पति की उम्र के आधार पर आईवीएफ से इनकार गलत,
00 हाईकोर्ट ने उम्रदराज दंपती के इलाज की अनुमति दी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि महिला मेडिकल रूप से फिट है और अन्य कानूनी व चिकित्सकीय शर्तें पूरी करती है, तो केवल उसके पति की अधिक उम्र के आधार पर उसे आईवीएफ/असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 6 अक्टूबर को दिए फैसले में एआरटी अधिनियम, 2021 की उम्र संबंधी शर्तों की व्याख्या करते हुए संबंधित आदेश निरस्त कर दिया।
मामले में दंपती करीब 22 वर्षों से विवाहित है और उनका कोई जीवित बच्चा नहीं है। महिला ने 2013 में आईयूआई उपचार कराया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2015 में गर्भधारण हुआ, लेकिन करीब चार महीने बाद गर्भपात हो गया। इसके बाद दंपती ने आईवीएफ/एआरटी उपचार के लिए रायपुर स्थित संबंधित क्लिनिक से संपर्क किया। चिकित्सकीय जांच और काउंसलिंग के बाद महिला को प्रस्तावित उपचार के लिए उपयुक्त पाया गया और अधिक उम्र को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेने को कहा गया।
दंपती के आवेदन को 31 जुलाई 2026 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि पति की उम्र 57 वर्ष है और वह एआरटी अधिनियम की धारा 21(जी)(ii) में पुरुष के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके हैं। हाईकोर्ट ने माना कि अधिनियम में महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग उम्र सीमा निर्धारित है तथा दंपती के लिए कोई संयुक्त उम्र सीमा नहीं दी गई है। ऐसे में पति की अधिक उम्र को महिला के उपचार पर पूर्ण रोक मानना कानून में ऐसी संयुक्त पाबंदी जोड़ने के समान होगा, जो अधिनियम में स्पष्ट रूप से नहीं है।
कोर्ट ने 31 जुलाई का आदेश रद्द करते हुए संबंधित प्राधिकरण और एआरटी क्लिनिक को महिला की मेडिकल पात्रता तथा अन्य कानूनी, नैतिक और नियामकीय शर्तें पूरी होने पर आईवीएफ/एआरटी उपचार आगे बढ़ाने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उपचार के दौरान महिला की उम्र 50 वर्ष से अधिक हो जाने पर केवल इस कारण से पहले से शुरू उपचार चक्र नहीं रोका जाएगा। हालांकि, उपचार मेडिकल सलाह, सूचित सहमति और लागू कानूनी शर्तों के अधीन रहेगा।
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल फिटनेस, जानकारी के आधार पर सहमति और माता-पिता की जिम्मेदारियां उठाने की क्षमता मौजूद हो तो केवल तय उम्र पार करने को व्यक्ति की गरिमा और निजी स्वतंत्रता से अलग करके नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने यह राहत मामले के विशेष तथ्यों तक सीमित रखते हुए कहा कि एआरटी अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों की अन्य अनिवार्य शर्तें यथावत लागू रहेंगी।
