मासूम बच्चों की गवाही ने मां की हत्या के आरोपी दादी एवं चाचा को उम्रकैद की सजा दिलाई
० पिता की मौत के बाद मां की हत्या, अनाथ हुए बच्चों को आर्थिक सुरक्षा दिलाने का निर्देश
बिलासपुर। पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती छाया सिंह ने मकान बनाने के विवाद पर मासूम बच्चों के सामने विधवा बहू की सब्बल मार कर हत्या करने वाली सास एवं देवर को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने बाल साक्षी शिवम एवं निधि की गवाही को स्वीकार किया। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मां की हत्या के बाद अनाथ हुए दोनों बच्चों को आर्थिक सुरक्षा दिलाए जाने का निर्देश दिया है।
बिल्हा थाना क्ष्ोत्र के ग्राम खम्हारडीह निवासी धनेश्वरी वैष्णव पति की मौत के बाद अपने 11 एवं 9 वर्ष के बच्चों के साथ गांव में रह रही थी। उनका अपनी सास प्रमिला वैष्णव एवं देवर लाला वैष्णव से मकान बनाने का विवाद था। धनेश्वरी 4 अप्रैल 2024 को बाजार से लौट रही थी तो रास्ते में देवर लाला वैष्णव एवं सास प्रमिला वैष्णव उसके साथ गाली गलौज करने लगे। गांव के कोटवार एवं अन्य लोगों ने झगड़ा शांत कराया। शाम 7.30 बजे प्रार्थी प्रहलाद वैष्णव अपनी दुकान में बैठा था, उसी समय धनेश्वरी के दोनों बच्चें दौड़ते हुए आकर उसे बताए कि चाचा लाला एवं दादी प्रमिला वैष्णव ने घर से सब्बल निकालकर उसकी मां को मार दिए व दोनों मोटर साइकिल में बैठकर भाग गए है। प्रहलाद की सूचना पर बिल्हा पुलिस ने प्रकरण पंजीबद्ब कर मौके से हत्या में प्रयुक्त सब्बल, आरोपियों के खून लगे कपड़ा आदि जप्त किया। पीएम रिपोर्ट गवाहों के बायान दर्ज कर मां-बेटे को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने अपराध सिद्ब होने एवं प्रतिपरीक्षण में भी मासूम बच्चों के विचलित नहीं होने पर उनकी गवाही को स्वीकार किया। उनकी गवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी देवर लाला वैष्णव एवं सास प्रमिला वैष्णव को धारा 302,34 में आजीवर कारावास एवं 100-100 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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अदालत ने मामले में मानवीय पहलुओं को भी देखा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले में मानवीय पहलुओं को देखना होगा। पति की मौत के बाद मृतका अपने मासूम बच्चों का पालन पोषण कर उन्हें समाज में जीने का तरीका बता रही थी। उन्हें एक सहारे की जरूरत थी। ऐसे समय में उनके सामने मां की हत्या हो गई। इससे बच्चे अनाथ हो गए है। वर्तमान में दोनों अपने किसी दूर के रिश्ते के बड़े पापा एवं मां के साथ रह रहें। बच्चों को उनकी मां से जो दुलार प्यार मिलता उसके अपेक्षा नहीं की जा सकती है। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर को आदेश की प्रति प्राप्त’ होने के तीन माह के अंदर शासन के प्रतिपूर्ति अधिनियम के तहत दोनों बच्चों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

kamlesh Sharma

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