फर्जी आईटीआई अंकसूची से रेलवे में नौकरी , लोको पायलट की याचिका खारिज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की युगलपीठ ने फर्जी आईटीआई अंकसूची के आधार पर रेलवे में नौकरी पाने वाले लोको पायलट मुकेश कुमार शर्मा की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने माना कि नियुक्ति के लिए जाली अंकसूची प्रस्तुत करने के मामले में करीब दो साल बाद दंड बढ़ाने की पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू करना अनुचित देरी नहीं है।
याचिकाकर्ता दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर में लोको पायलट (मालगाड़ी) के पद पर कार्यरत था। विभागीय जांच में पाया गया कि उसने नौकरी पाने के लिए आईटीआई इलेक्ट्रीशियन ट्रेड की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत की थी। संबंधित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य ने उसके वहां प्रशिक्षण लेने और अंकसूची जारी किए जाने से इनकार किया था। इसके आधार पर विभाग ने 1 मई 2019 को उसके वेतन में पांच वर्ष तक कटौती का दंड दिया था। बाद में रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक ने 29 जून 2021 को दंड बढ़ाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसे वापस ले लिया गया। इसके बाद 20 अक्टूबर 2021 को महाप्रबंधक ने नया नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए तर्क दिया कि रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 के तहत निर्धारित छह महीने की अवधि बीतने के बाद कार्रवाई नहीं की जा सकती। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित नियमों के तहत महाप्रबंधक को निर्धारित परिस्थितियों में पुनरीक्षण की शक्ति प्राप्त है। जहां कानून में समय-सीमा निर्धारित नहीं है, वहां भी इस शक्ति का इस्तेमाल उचित अवधि के भीतर किया जाना चाहिए। हालांकि, मामले में मूल दंडादेश के करीब दो वर्ष बाद पुनरीक्षण की कार्रवाई शुरू की गई थी। परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इसे अत्यधिक देरी नहीं माना। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि विभागीय जांच में फर्जी अंकसूची और आवश्यक योग्यता के अभाव संबंधी निष्कर्ष को चुनौती नहीं दी गई थी।
अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता ने आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के बिना नौकरी प्राप्त की थी और पुनरीक्षण प्राधिकारी की कार्रवाई में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए रिट याचिका खारिज कर दी।
