आबकारी कमिश्नर और अपर आयुक्त को अवमानना नोटिस,
हाईकोर्ट ने पूछा- क्यों न शुरू की जाए कार्रवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विभागीय प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े आदेश का पालन नहीं होने पर आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को अवमानना नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थ प्रीतम साहू की एकलपीठ ने की।
महर्षि स्कूल रोड, बिलासपुर निवासी मुकेश कुमार शर्मा जिला जांजगीर-चांपा में आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। आबकारी उपनिरीक्षक पद की विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में सेवा अभिलेख (एसीआर) के 15 अंक कम दिए जाने के कारण वे अनुत्तीर्ण हो गए थे। इसके खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को पारित आदेश में कहा था कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के सेवा अभिलेखों में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज करने से पहले याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस देकर सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांतों के आधार पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 90 दिनों के भीतर अन्य सेवा अभिलेखों के आधार पर याचिकाकर्ता के मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर मुकेश कुमार शर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से आदेश की अनदेखी का मुद्दा उठाए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए 28 सितंबर 2026 को दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा कि आदेश का पालन नहीं करने पर उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
