लगातार ऐसा माहौल बनाना, जिसमें आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता न दिखे, धारा 306 के तहत दुष्प्रेरण के दायरे में-हाई कोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या के मामले में कहा लगातार ऐसा माहौल बनाना, जिसमें व्यक्ति को आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता न दिखे, धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के दायरे में आ सकता है। पति का कृत्यों से पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर किए जाने की स्थिति सामने आती है। इसके साथ कोर्ट ने डॉक्टर पति को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने साक्ष्यों और बच्चों के बयानों के आधार पर माना कि पति के दूसरी महिला से संबंध और पत्नी के साथ लगातार शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के कारण उसके सामने आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है।दरअसल, रश्मि प्रकाश ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके भाई आशीष नाथ ने पति डॉ. संजय प्रकाश पर हिंसा और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। निचली अदालत ने 28 जून 2016 को डॉ. संजय प्रकाश को धारा 498-ए के तहत 3 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माना सुनाया था, लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया था। मृतका के भाई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जबकि डॉक्टर ने भी अपनी सजा के खिलाफ अपील की। सुनवाई के दौरान मृतका के बेटे रोहित और बेटी तनिष्का समेत अन्य गवाहों के बयानों पर कोर्ट ने गौर किया। बच्चों ने बताया कि डॉक्टर के क्लीनिक में काम करने वाली नर्स से संबंध थे। मां के विरोध करने पर पिता ने उसके साथ मारपीट की थी। बच्चों ने यह भी बताया कि मां को पानी में नींद की गोलियां घोलकर दी गई थीं और घटना से एक दिन पहले भी उसके साथ मारपीट हुई थी। पति ने तलाक देकर नर्स से शादी करने की धमकी भी दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को अलग-अलग देखकर निष्कर्ष निकाला, जबकि सभी साक्ष्यों को एक साथ देखने पर पति के कृत्यों से पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर किए जाने की स्थिति सामने आती है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लगातार ऐसा माहौल बनाना, जिसमें व्यक्ति को आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता न दिखे, धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के दायरे में आ सकता है।
