अनुसूचित क्षेत्र में लंबे समय तक सेवा फिर भी तबादला, हाईकोर्ट ने लगाई रोक
० वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष अभ्यावेदन देने का निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा जिले में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह के गरियाबंद स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 10 दिनों के भीतर वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। समिति के निर्णय तक स्थानांतरण पर रोक प्रभावी रहेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी तथा अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखते हुए बताया कि राकेश कुमार सिंह वर्ष 2006 में सेवा में आए थे। उन्होंने जशपुर में 2006 से 2011 तक, रायगढ़ में 2016 से 2022 तक और इसके बाद कोरबा में पदस्थ रहते हुए कुल 16 वर्ष 7 माह अनुसूचित क्षेत्रों में सेवा दी है। इसके बावजूद शासन ने 16 सितंबर 2026 को उनका स्थानांतरण गरियाबंद कर दिया*
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह स्थानांतरण राज्य शासन के 3 जून 2015 के सर्कुलर का उल्लंघन है* सर्कुलर के अनुसार दुर्गम अनुसूचित क्षेत्र में कम से कम दो वर्ष और सामान्य अनुसूचित क्षेत्र में तीन वर्ष की पदस्थापना के बाद, उपलब्ध रिक्तियों और संबंधित कर्मचारी की सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए गैर-अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थापना पर विचार किया जाना चाहिए।
गरियाबंद में पद रिक्त नहीं होने का भी तर्क
याचिका में यह भी बताया गया कि गरियाबंद में सहायक जिला आबकारी अधिकारी का एक ही स्वीकृत पद है। इस पद पर पदस्थ लालजी दीवान का स्थानांतरण 16 सितंबर को कबीरधाम किया गया था, जिसके विरुद्ध उन्होंने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, ऐसे में गरियाबंद में पद रिक्त होने की स्थिति भी विवाद का विषय है। इन आधारों पर हाईकोर्ट ने राकेश कुमार सिंह के स्थानांतरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें शासन के सर्कुलर और डिवीजन बेंच की रिट अपील में दिए गए फैसले के तहत वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया। समिति द्वारा अभ्यावेदन का निराकरण किए जाने तक स्थानांतरण आदेश पर रोक जारी रहेगी।
