भारत निर्वाचन आयोग की अपील खारिज, चुनावी सामग्री के बकाया भुगतान का मामला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान टेंट, लाइट, माइक, जनरेटर सहित अन्य सामग्री की सप्लाई के बकाया भुगतान के मामले में कमर्शियल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग की अपील खारिज कर दी। डिवीजन बेंच के जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत ने यह आदेश दिया।
मामले के अनुसार, कोंडागांव जिला मुख्यालय में विधानसभा चुनाव 2013 के लिए मेसर्स नीलेश टेंट हाउस एंड लाइट डेकोरेशन, जगदलपुर को सामग्री सप्लाई का वर्क ऑर्डर दिया गया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव 2014 के लिए भी टेंट, लाइट, माइक और जनरेटर आदि की सप्लाई का काम दिया गया। फर्म ने दोनों कार्यों के लिए करीब 48.33 लाख और 71.15 लाख रुपये के बिल प्रस्तुत किए, लेकिन पूरी राशि का भुगतान नहीं हुआ।
भुगतान के लिए फर्म ने अधिकारियों से आग्रह किया और बाद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 19 फरवरी 2016 को हाईकोर्ट ने बिलों का सत्यापन कर दावे पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। इसके बाद 31 मार्च 2016 को अधिकारियों ने फर्म के बड़े दावे में से केवल 1,22,311.75 रुपये स्वीकार किए। इसके बाद फर्म ने बकाया राशि की वसूली के लिए सिविल केस दायर किया, जिसमें कमर्शियल कोर्ट ने 69,69,375 रुपये की मनी डिक्री पारित की थी।
अपील में निर्वाचन आयोग की ओर से दावा किया गया कि फर्म का मुकदमा परिसीमा अवधि के बाद दायर हुआ है। हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि बकाया राशि की वसूली के लिए कार्रवाई का कारण 31 मार्च 2016 को अंतिम निर्णय के बाद पैदा हुआ। इसलिए 27 मार्च 2019 को दायर मुकदमा तीन वर्ष की अवधि के भीतर था।
बेंच ने आवश्यक पक्षकार को शामिल नहीं किए जाने की आपत्ति भी स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष इस मुद्दे पर प्रभावी बहस नहीं की गई थी, इसलिए अपील के स्तर पर इसे उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने कमर्शियल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया। निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार झा, अधिकारियों की ओर से सुनीता मानिकपुरी और मेसर्स नीलेश टेंट हाउस एंड लाइट डेकोरेशन की ओर से मनीष निगम ने पैरवी की।
