पीड़िता ने कहा- आरोपी शादी के लिए तैयार, जमानत पर एतराज नहीं
बिलासपुर। शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर पीड़िता ने हाईकोर्ट में उपस्थित हुई और कहा कि उसे आरोपी को जमानत देने पर कोई एतराज नहीं है, बशर्ते वह उससे शादी करे। शादी के लिए शुरू की गई प्रक्रिया के दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए गए। इस आधार पर हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश एट्रोसिटी द्वारा अग्रिम जमानत खारिज करने का आदेश रद्द कर आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की अनुसूचित जनजाति समुदाय की युवती ने गैर-अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवक के खिलाफ शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने एट्रोसिटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया। आरोपी की ओर से कहा गया कि दोनों वर्ष 2021 से संपर्क में थे और करीब पांच वर्ष तक संबंध रहे। संबंध सहमति से थे तथा आरोपी ने शादी के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों की शादी 12 अक्टूबर 2026 को मैरिज रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकृत होनी है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एफआईआर में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी ने पीड़िता की जाति या समुदाय के कारण उसके साथ संबंध बनाए। शासन ने जमानत का विरोध किया।
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने कहा कि पीड़िता स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर जमानत पर कोई आपत्ति नहीं होने और आरोपी से शादी की बात कह चुकी है। एफआईआर में भी जाति के आधार पर संबंध बनाने का कोई विशेष आरोप नहीं है। पीड़िता बालिग और पढ़ी-लिखी है तथा शादी के पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
