माँ की मौत हो गई, हाई कोर्ट ने शासन के विरोध के बावजूद सजा काट रहे बेटो को अस्थायी जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया
बिलासपुर। हाईकोर्ट की अवकाशकालीन कोर्ट ने मानवीय आधार पर हत्या के प्रयास के आरोप में सजा काट रहे भाईयों को माँ की मौत होने पर 10 वा कार्यक्र्म में शामिल होने पांच दिन के लिए अस्थाई जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है। दोनों को 15 जून को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है।
बलौदाबाजार जिला के ग्राम गिधौरी टुंड्रा चौकी गिरौदपुरी निवासी शत्रुहन साहू उर्फ पिंकू एवं उसका भाई जवाहर लाल साहू को अदालत से 294, 506, 307 में दस वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है। दोनों सजा काट रहें। बंदियों की माँ धन बाई साहू की 4 जून 2026 को बलौदाबाजार के सरकारी अस्पताल में मौत हो गई। मां के दसवां कार्यक्रम में शामिल होने दोनों की ओर से अस्थाई जमानत दिए जाने आवेदन पेश किया गया था। आवेदन में कहा गया कि अपील करने वाले हिदू कम्युनिटी से हैं और हिदू रीति-रिवाज के अनुसार 10 वें दिन की रस्म में उनका होना ज़रूरी है। इस लिए टेम्पररी बेल देने की प्रार्थना की गई। आवेदन में सरकारी हॉस्पिटल बलोदाज़ार के मेडिकल ऑफिसर का जारी किया गया डेथ सर्टिफिकेट एवं शोक पत्र प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से अस्थाई जमानत दिए जाने को विरोध किया गया। अपीलकर्ता एवं शासन के पक्ष को सुनने के बाद जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने आदेश में कहा रिकॉर्ड में रखे गए दस्तावेज को ध्यान में रखते हुए कि अपील करने वालों की मां की मौत 04.06 2026 को हो गई है और 10 वें दिन की रस्म 13.06.2026 को होनी है, इसलिए, दोनों एप्लीकेशन को मंज़ूरी देता हूं। कोर्ट ने अपील करने वालों को 5 दिनों के लिए टेम्पररी बेल पर रिहा करने का आदेश दिया है। उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए हर एक को 10,000/- का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम का एक श्योरिटी देना होगा। अपील करने वाले 15 जून, 2026 को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करेंगे।
