चीफ जस्टिस ने 19 कार्य दिवसों में 2111 प्रकरणों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण कर न्यायिक कार्यों में गति प्रदान की
00 छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों में ऐतिहासिक कमी
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्बारा न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, संवेदनशील तथा समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे निरंतर एवं समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप जनवरी, 2026 से 27 जुलाई 2026 तक लंबित प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में कुल 75,667 प्रकरण लंबित थे। जनवरी, 2026 से 27/07/2026 तक 30,831 नए प्रकरण संस्थित हुए। इन प्रकरणों के शीघ्र एवं प्रभावी निराकरण हेतु विशेष अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप 27 जुलाई 2026 तक कुल 32,747 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया, जिससे 27/07/2026 की स्थिति में लंबित प्रकरणों की संख्या घटकर 73,751 हो गई। इन प्रयासों के फलस्वरूप जनवरी, 2026 से 27/07/2026 तक में लंबित प्रकरणों की संख्या में 2.53 प्रतिशत की शुद्ध कमी दर्ज की गई। विशेष रूप से उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इस अवधि में निराकरण दर 106.21 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाती है कि नए संस्थित प्रकरणों की तुलना में अधिक संख्या में पुराने लंबित प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।
ग्रीष्मावकाश के दौरान लंबित प्रकरणों की संख्या में वृद्धि हुई थी। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने अपनी खंडपीठ में अधिक संख्या में प्रकरणों की सुनवाई की। 1 जुलाई से 27 जुलाई 2026 के मध्य मात्र 19 कार्य दिवसों में उन्होंने 2111 प्रकरणों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण कर न्यायिक कार्यों में गति प्रदान की।
यह उपलब्धि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के दूरदर्शी नेतृत्व, उच्च न्यायालय के सभी माननीय न्यायाधीशों की प्रतिबद्धता तथा न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के समर्पित एवं समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। इन प्रयासों से न केवल न्यायिक व्यवस्था की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि आम नागरिकों को त्वरित, प्रभावी एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण एवं मील का पत्थर सिद्ध हुआ है।
