पटवारी से आरआई बनने परीक्षा सफल होने वाले अभ्यर्थियों की एसएलपी खारिज

00 सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप से इंकार किया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विवादित विभागीय परीक्षा मामले में सफल अभ्यर्थियों को लगातार तीसरा न्यायिक झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सिंगल बेंच और उसके बाद डिवीजन बेंच से राहत नहीं मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इंकार करते हुए विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही परीक्षा निरस्त करने संबंधी छत्तीसगए हाई कोर्ट का आदेश अंतिम रूप से बरकरार रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार के लिए नई परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने धनंजय सिंह व अन्य द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका SLP पर सुनवाई करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में हुई थी

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य को पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षा की पवित्रता और निष्ठा को बनाए रखते हुए नई परीक्षा आयोजित करने की स्वतंत्रता है। कोर्ट ने सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया था।सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में दी थी चुनौती धनंजय सिंह और अन्य ने सिंगल बेंच द्वारा 02 जनवरी 2026 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच मे हुए निर्णय के अनुसार, उम्मीदवारों की पहचान को सक्षम बनाकर परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है, जिससे निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होता है। न्यायालय ने आगे यह भी पाया कि 90 मिनट की समान अवधि में प्रश्नों की संख्या 50 से बढ़ाकर 100 कर दी गई थी, जिससे सभी प्रश्नों को हल करने की व्यवहार्यता पर संदेह पैदा होता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां कुछ उम्मीदवारों ने बहुत अधिक अंक प्राप्त किए थे*कोर्ट ने इस व्यवस्था पर जताया संदेह विभिन्न जिलों में तैनात 22 निकट संबंधियों को लगातार रोल नंबर आवंटित करना भी संदेह का विषय माना गया। वंशिका यादव बनाम भारत संघ और पश्चिम बंगाल राज्य बनाम बैशाखी भट्टाचार्य (चटर्जी) और अन्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों पर भरोसा करते हुए, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षाओं की पवित्रता और निष्पक्षता को संरक्षित किया जाना चाहिए और प्रणालीगत समझ परीक्षा रद्द करने का औचित्य सिद्ध कर सकता है।

kamlesh Sharma

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