हाई कोर्ट ने अंबिकापुर के महामाया पहाड़ व डबरीपानी संरक्षित वन भूमि में
बेजा कब्जा करने वालों को अंतरिम राहत देने से इंकार किया
00 कोर्ट ने शासन को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने छूट दी
बिलासपुर। हाई कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच ने सरगुजा के महामाया पहाड़ और डबरीपानी संरक्षित वन भूमि पर बेजा कब्जा करने वालों की अंतरिम राहत आवेदन को खारिज कर दिया है। आवेदन में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित कि गई है।
सरगुजा के महामाया पहाड़ और डबरी पानी रिजर्व फोरेस्ट इलाके में रशीदा खातून व अन्य कई सालों से बेजा कब्जा कर मकान बनाकर रह रहे हैं। राजस्व विभाग व वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने अंतिम नोटिस जारी किया है। नोटिस में एक सप्ताह का समय दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने हाईकोर्ट में कार्रवाई पर रोक लगाने अर्जेंट हिरिग आवेदन दिया था। याचिका में कहा कि पिटीशनर्स को 17.मार्च 2026 को नोटिस जारी होने की तारीख से 7 दिनों के अंदर उस ज़मीन से अपना कब्ज़ा हटाने का निर्देश दिया गया है, ऐसा न करने पर, रेस्पोंडेंट अथॉरिटीज़ पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन की मदद से पिटीशनर्स का कब्ज़ा हटवा देंगी। पिटीशनर्स के वकील का कहना है कि, पिटीशनर्स का उस ज़मीन पर 15-20 साल से कब्ज़ा है, लेकिन, डिवीज़न फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसर ने 25.जनवरी 2025 को, पिटीशनर्स के फ़ाइल किए गए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स की ठीक से जांच किए बिना, एक ऑर्डर पास किया है जिसमें कहा गया है कि पिटीशनर्स अपने जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर उस फ़ॉरेस्ट ज़मीन पर अपना अधिकार और मालिकाना हक साबित करने में नाकाम रहे हैं।
बिना रिहैबिलिटेशन बेदखली गलत
पिटीशनर्स के वकील का कहना है कि पिटीशनर्स ने उस ज़मीन पर अपना सुपरस्ट्रक्चर बनाया है और पिछले 15-20 सालों से वहीं रह रहे हैं और बिना किसी रिहैबिलिटेशन स्कीम के, पिटीशनर्स को उस ज़मीन से बेदखल करना गलत होगा। शासन के वकील का कहना है कि उस फ़ॉरेस्ट ज़मीन के संबंध में पिटीशनर्स के पक्ष में कोई अलॉटमेंट नहीं हुआ है। पिटीशनर्स ने जंगल की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है और उन्हें बेदखल करने का ऑर्डर सही तरीके से पास किया गया है।डॉक्यूमेंट्स पेश करने में नाकाम जस्टिस एन के व्यास की वेकेशन बेंच ने कहा कि,हमने मामले के फैक्ट्स और हालात देखे,पिटीशनर भी रेस्पोंडेंट अथॉरिटीज़ के सामने कोई भी ऐसा डॉक्यूमेंट्स पेश करने में नाकाम रहे हैं जिससे यह साबित हो सके कि, उस जंगल की ज़मीन पर उनका हक और मालिकाना हक है, इन सभी मामलों में पिटीशनर्स के पक्ष में कोई अंतरिम राहत देने के लिए कोर्ट तैयार नहीं है इसलिए, अंतरिम राहत देने की एप्लीकेशन खारिज की जाती है। रेस्पोंडेंट अथॉरिटीज़ इस मामले में कानून के मुताबिक आगे बढ़ेंगी। इन मामलों पर विचार करने की ज़रूरत है, इसलिए इन मामलों को आगे की सुनवाई के लिए 13 जुलाई, 2026 को लिस्ट किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि वन भूमि में 157 परिवार ने अतिक्रमण कर मकान निर्माण किया है।
