छत्तीसगढ़ पीएससी का पूर्व चेयरमैन अतिरिक्त पेंशन पाने का हकदार नहीं-हाईकोर्ट
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट के बाद छत्तीसगढ़ पीएससी में चेयरमैन के पद में कार्य करने के एवज में अतिरिक्त पेंशन दिलाए जाने की मांग करते हुए पेश याचिका को खारिज किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता 5-12-2020 के रेगुलेशन के हिसाब से एक्स्ट्रा पेंशन के फायदे का हकदार नहीं है और इसे रिट ऑफ़ मैंडेमस से बदलने का निर्देश नहीं दिया जा सकता कि इसे 1-1-2016 से लागू किया जाए। 2001 के रेगुलेशन 8(3) के तहत तय लिमिट 4 लाख 80 हजार रहा। याचिकाकर्ता की रिटायरमेंट के समय पेंशन 11,59,800/- थी, जो 4,80,000/- की मैक्सिमम लिमिट से कहीं ज़्यादा है। इसलिए, याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ पीएससी के चेयरमैन के तौर पर एक्स्ट्रा पेंशन का हकदार नहीं था। इसलिए, वह एक्स्ट्रा पेंशन के फायदे का हकदार नहीं है और साथ ही कोई रिट ऑफ़ मैंडेमस जारी नहीं किया जा सकता है जिससे नियम बनाने वाली अथॉरिटी को 2001 के रेगुलेशन 8(3) / 5-12-2020 के नोटिफिकेशन को 1-1-2016 से लागू करने का निर्देश दिया जा सकता है।
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मामला यह है याचिकाकर्ता आरएस विश्वकर्मा छत्तीसगढ़ सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे और 31-1-2015 से उस पद से रिटायर हो गए थे और रिटायरमेंट के समय उनकी पेंशन 11,59,800/- सालाना तय की गई थी। उस पोस्ट से रिटायर होने के बाद, पिटीशनर से छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन के मेंबर के तौर पर काम करने की रिक्वेस्ट की गई, जिसे उसने छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन रेगुलेशन, 2001 के अनुसार मान लिया, जिसे स्टेट गवर्नमेंट यानी रूल मेकिग अथॉरिटी ने इंडिया के कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 318(ए) के अनुसार जारी किया था, जिसमें पिटीशनर 7-3-2015 को शामिल हुआ, उसके बाद, उसे 12-6-2015 के ऑर्डर से छत्तीसगढ़ पीएससी का चेयरमैन अपॉइंट किया गया। छत्तीसगढ़ पीएससी के मेंबर के तौर पर, पिटीशनर ने 2001 के रेगुलेशन 8(1) के तहत एक ऑप्शन भी दिया, ताकि जिस सर्विस में उसे अपॉइंट किया गया था, उस पर लागू नियमों के तहत पेंशन और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिल सकें। पिटीशनर 62 साल का होने पर, 16-1-2017 से छत्तीसगढ़ पीएससी के चेयरमैन की सर्विस से रिटायर हो गया। 19-5-2017 को छत्तीसगढ़ पे रिवीजन रूल्स, 2017 नोटिफाई किए गए, जो 1-1-2016 से लागू हुए। ये रूल्स कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारियों को छोड़कर सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू किए गए। पे रिवीजन के बाद, छत्तीसगढ़ पीएससी ने 2001 के रेगुलेशन में बदलाव की सिफारिश की और बदलाव की सिफारिश करते हुए, पीएससी ने 7वें पे कमीशन के आने के बाद पेंशन की मैक्सिमम लिमिट के तौर पर 13,50,000/- सालाना की सिफारिश की, जो इससे पहले यह 4,80, 000/- थी। इस सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने 5-12-2020 को 2001 के रेगुलेशन में बदलाव किया, जिसे 1-4-2018 से लागू किया गया। बदले हुए रेगुलेशन 8(3) के अनुसार, पीएससी के चेयरमैन को मिलने वाली ज़्यादा से ज़्यादा पेंशन 1-4-2018 से बढ़ाकर 13,50, 000/- सालाना कर दी गई। याचिकाकर्ता पीएससी में पदस्थ रहे पूर्व सदस्यों एवं एमपी पीएससी के चेयरमैन को दिए जा रहे अतिरिक्त पेंशन की तरह लाभ दिलाए जाने की मांग की थी।
