पत्नी की क्रूरता को माफ किए जाने पर पति तलाक का हकदार नहीं-हाईकोर्ट
बिलासपुर। हाई कोर्ट ने निचली अदालत से पारित तलाक की डिग्री को निरस्त करते हुए कहा कि पति ने पत्नी की ओर से किए गए क्रूरता के पिछले कृत्य को माफ कर दिया था। पति ने न केवल आईपीसी दर्ज करने और उसके परिवार के सदस्य पर आईपीसी की धारा 498-ए के तहत अपराध के लिए मुकदमा चलाने के पत्नी के कृत्य को माफ कर दिया, बल्कि 7 साल की लंबी अवधि तक पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहकर वैवाहिक संबंध को भी बहाल किया। पति ने पत्नी की तरफ से गैर पुरूष के साथ किए गए किसी भी सेक्सुअल एक्ट को भी माफ कर दिया था। प्रावधानों के आधार पर पति 1955 के अधिनियम की धारा 13(1) के तहत बताए गए आधार पर शादी को खत्म करने की डिक्री का हकदार नहीं है।
अपीलकर्ता पत्नी की प्रतिवादी से वर्ष 2003 में विवाह हुआ था। विवाह के पांच वर्ष बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करा पति एवं उसके परिवार वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई। विचारण न्यायालय ने 2009 में पति एवं उसके परिवार वालों को आईपीसी की धारा 498 ए से दोषमुक्त किया। दोषमुक्त होने के बाद दोनों 2010 से 2017 तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहकर वैवाहिक जीवन का निर्वहन करते रहें। 17 दिसंबर 2017 को पत्नी पति का घर छोड़कर चली गई। इसके बाद पति ने परिवार न्यायालय में तलाक के लिए 2020 में आवेदन दिया। आवेदन में पत्नी की ओर से क्रूरता साबित करने 498 ए के तहत दर्ज कराई गई एफआईआर एवं पत्नी का अन्य पुरूष से संबंध होने की बात कही गई। परिवार न्यायालय ने इसे क्रूरता मानते हुए पति के पक्ष में तलाक का डिग्री पारित किया।
इसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। हाईकोर्ट ने अपील में सुनवाई उपरांत अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने 2008 में आईपीसी की धारा 498 ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई। मामले में दोषमुक्त होने के बाद 2010 से दिसंबर 2017 तक दोनों साथ रहें। इससे साफ है कि पति ने पत्नी के कृत्य को माफ किया था। इसके बाद उसने 2020 में तलाक के लिए आवेदन दिया। इसके बाद 2023 में एक संशोधन आवेदन प्रस्तुत कर पत्नी का अन्य पुरूष के साथ संबंध होने की बात कही गई। इसमें कहा गया था कि गवाह ने उसकी पत्नी को 2 अक्टूबर 2017 को एक अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा है। इस संबंध में 8 दिसंबर 2017 को गांव में बैठक बुलाई गई थी। इसके बाद पत्नी 17 दिसंबर 2017 को पति का घर छोड़कर चली गई। इस बिन्दू पर हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ने 2 अक्टूबर 2017 को अन्य पुरूष से संबंध बनाई यह जानते हुए भी पति उसके साथ 17 दिसंबर 2017 तक साथ रहे। इससे साफ है कि उसने पत्नी के इस कृत्य को भी माफ किया था। इसके अलावा पति नेे अपने आवेदन में देरी से संशोधन पेश कर पत्नी के गैर पुरूष के साथ संबंध होने की बात कही है, इस कारण से यह भी संदिग्ध है। इसके साथ ही कोर्ट ने अपील स्वीकार कर तलाक की डिग्री को रद्द किया है।
