14 साल पुराना अज्ञात एसीआर का हवाला देकर सहायक प्रध्यापक का प्रमोशन रोका

00 हाई कोर्ट ने तीन माह में रिव्यू डीपीसी बुलाकर पदोन्नति देने का आदेश दिया

2011 के खराब एसीआर की जानकारी 2025 में दी गई

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने बिना बताई गई एसीआर, जिसमें खराब टिप्पणी थी, के आधार पर याचिकाकर्ता डॉ. सुनंदा मरावी को प्रमोट न करने का उच्च शिक्षा विभाग के कदम मनमाना, नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हुए विभाग को तीन माह के अंदर रिव्यू डीपीसी कर याचिकाकर्ता को उसी दिन से प्राध्यापक के पद में प्रमोशन देने का आदेश दिया है जिस दिन से उसके जूनियर पदोन्नति प्रा’ किए है। इसके साथ उसे पदोन्नति वाला पे ग्रेड देने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता वेतन का एरियर्स पाने का कहकदार नहीं होगा। याचिकाकर्ता डॉ. श्रीमती सुनंदा मरावी पत्नी मनोज मरकाम वर्तमान में सहायक प्रोफ़ेसर (हिदी) शासकीय ई. राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय, बिलासपुर में पदस्थ हैं। उन्हें 28 जुलाई 2025 को आदेश से जानकारी मिली प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए एलिजिबल कैंडिडेट्स की लिस्ट में उनका नाम शामिल करने की उसकी रिप्रेजेंटेशन को इस आधार पर रिजेक्ट कर दिया गया। पिटीशनर एसीआर के इवैल्यूएशन में 13 मार्क्स का मिनिमम बेंचमार्क हासिल करने में फ़ेल रही। इसके खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता राहुल झा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश की। याचिका में कहा गया कि पिटीशनर ने प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए तय सभी ज़रूरी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरे किए। जब पिटीशनर प्रोफ़ेसर के पद पर अपने प्रमोशन पर विचार कर रही थी, तो हैरानी की बात है कि उसे रेस्पोंडेंट डिपार्टमेंट से 18.02.2025 का एक कम्युनिकेशन मिला, जिसमें उसे बताया गया कि साल 2011 की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) में गलत बातें थीं और पिटीशनर को ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ अपना रिप्रेजेंटेशन जमा करने का निर्देश दिया गया था। जिस पर पिटीशनर ने 21 फरवरी 2025 को अलग-अलग वजहों से जवाब दिया, जिसमें यह ज़रूरी वजह भी शामिल थी कि उसे उस समय के लिए उसके इएट में की गई गलत एंट्री के बारे में कभी नहीं बताया गया। याचिका में जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता एवं शासन के अधिवक्ता के तर्क को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा इस मामले में याचिकाकर्ता को इस आधार पर प्रमोट नहीं किया गया कि उसने 2008 से 2012 के समय के लिए 13 मार्क्स का मिनिमम बेंचमार्क हासिल नहीं किया था। हालांकि, यह माना जाता है कि एसीआर उसे कभी भी समय पर नहीं बताई गईं। साल 2011 के लिए खराब एसीआर के संबंध में साल 2025 में किया गया कम्युनिकेशन साफ तौर पर देर से किया गया है और इसने याचिकाकर्ता को सही समय पर रिप्रेजेंटेशन करने का मौका नहीं दिया। एसीआर को बनाए रखने और शेयर करने का असली मकसद किसी कर्मचारी को उनके परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन के बारे में बताकर 9/10 ट्रांसपेरेंसी, फ़ेयरनेस और प्रोफ़ेशनल डेवलपमेंट पक्का करना है। जब ऐसी रिपोर्ट को लंबे समय तक रोक कर रखा जाता है, तो यह नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों को कमजोर करता है। किसी ऑफिसर के हायर ग्रेड में प्रमोशन के लिए असेसमेंट करते समय कघ्ए बेंचमार्क से नीचे के अनकम्युनिकेटेड एसीआर को नहीं देख सकता। इस मामले में, पिटीशनर को उस समय ऐसे मौके से वंचित किया गया था। कोर्ट ने याचिका को मंज़ूर किया है। 28.07.2025 की विवादित सूचना रद्द रद्द करते हुए उच्च शिक्षा विभाग रेस्पोंडेंट्स को निर्देश दिया है कि वे प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए याचिकाकर्ता के मामले पर फिर से विचार करने के लिए एक रिव्यू डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (रिव्यू डीपीसी) बुलाएं, जिसमें खराब एंट्री वाली बिना बताई गई एसीआर को नज़रअंदाज़ किया जाए। अगर रिव्यू डीपीसी पिटीशनर को प्रमोशन के लिए फिट पाती है और उसके नाम की सिफारिश करती है, तो उसे उसी तारीख से प्रमोशन दिया जाएगा जिस तारीख को उसके तुरंत जूनियर को प्रमोशन मिला था, साथ ही उसे सभी फायदे भी दिए जाएंगे, जिसमें नोशनल सीनियरिटी और पे का फिक्सेशन शामिल है। हालांकि, वह सैलरी के एरियर की हकदार नहीं होगी। कोर्ट ने आदेश प्रा’ होने के तीन माह के अंदर प्रक्रिया पूरा करने का निर्देश दिया है। याचिका में छत्तीसगढ़ राज्य के माध्यम से- सचिव उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय, नया रायपुर, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग इंद्रावती भवन एवं प्राचार्य शासकीय, ई. राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय, बिलासपुर को पक्षकार बनाया गया था।

kamlesh Sharma

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