जमीन विवाद पर तीन लोगों की हत्या
00 हाई कोर्ट ने आरोपी पिता-पुत्र की सजा के खिलाफ पेश अपील खारिज किया
बिलासपुर। हाई कोर्ट ने घायल गवाह के बयान को हत्या का पुख्ता साक्ष्य मानते हुए जमीन विवाद पर तीन लोगों की हत्या करने के आरोपी पिता-पुत्र की सजा के खिलाफ पेश अपील को खारिज करते हुए विचारण न्यायालय के आदेश की पुष्टि की है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि एक “संबंधित” गवाह, जो एक घायल गवाह भी है, जो क्राइम की जगह पर नैचुरली मौजूद हो सकता है, उसकी गवाही को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह पीड़ित से जुड़ा है और कोर्ट को उसके बयान की भरोसेमंदता, एक जैसापन और तालमेल का आकलन करना चाहिए।
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मामला यह है
तुमगांव थाना क्षेत्र के ग्राम जोबा में 11.09.2020 को सुबह 04.00 बजे से 05.00 बजे के बीच आरोपी परसराम गायकवाड़ और बृज सेन गायकवाड़ ने जमीन बंटवारे के विवाद में ओसराम गायकवाड़ के घर मे घुसकर उसके और उसकी पत्नी जागृति गायकवाड़ की आंखों में मिर्च पाउडर फेंक दिया और उन पर खंजर से हमला कर दिया। हमला होने पर ओस राम जान बचाने अपने भाई के घर मे घुस गया। आरोपियों ने उसकी पत्नी जागृति, 16 वर्षीय पुत्री टीना गायकवाड़, 9 वर्षीय पुत्र मनीष गायकवाड़ की गला काट कर हत्या कर दी। एक कमरे का दरवाजा तोड़कर पुत्री गीतांजलि गायकवाड़, ओमान गायकवाड़ व ओस राम की बुजुर्ग माँ अनारबाई गायकवाड़ को गम्भीर रूप से घायल कर दिया। सूचना पर तुमगांव पुलिस मौके में पहुँच आरोपियों को हिरासत में लिया व घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। विवेचना उपरांत न्यायालय में चालान पेश किया गया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 459 के तहत 10 वर्ष के लिए साधारण कारावास और 500 रुपये का जुर्माना और जुर्माना राशि का भुगतान न करने पर 6 महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास आईपीसी की धारा 302 के साथ 34 के तहत (तीन बार) आजीवन कारावास और 500 रुपये का जुर्माना। 1000/- और जुर्माना राशि के भुगतान के अभाव में, 01 वर्ष के लिए अतिरिक्त आरआई आईपीसी की धारा 307 , 34 के तहत (चार बार) 10 वर्ष के लिए साधारण कारावास और 500/- रुपये का जुर्माना और जुर्माना राशि के भुगतान के अभाव में, 06 माह के लिए अतिरिक्त सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ आरोपियों ने हाई कोर्ट में अपील पेश की थी। अपील में आरोपियों ने मामले में स्वतंत्र गवाह नहीं होने व घायल गवाहों के पीड़ितों से सम्बंधित होने के कारण भरोसेमंद नहीं होने की बात कही गई थी। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज किया है।
कोर्ट ने आदेश में कहा
आरोपी बिना इजाज़त के ओसकुमार के घर में घुसकर, लोहे के खंजर और मिर्च पाउडर से लैस होकर, आरोपियों ने जागृति गायकवाड़, टीना गायकवाड़ और मनीष गायकवाड़ की हत्या कर दी। ओसकुमार गायकवाड़, ओमान गायकवाड़, गीतांजलि गायकवाड़ और अनारबाई पर हत्या के इरादे से हमला किया गया और उन्हें गंभीर शारीरिक नुकसान पहुँचाया गया। इसलिए आरोपी की सज़ा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा जाता है।
