छोटी सजा के मामले में भी कर्मचारी को आरोपों का सामना करने और अपनी सफाई देने का अवसर देना प्राकृतिक न्याय की न्यूनतम आवश्यकता,
हाईकोर्ट ने सजा का आदेश रद्द किया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक ड्राफ्ट्समैन प्रभावती पटेल के खिलाफ बिना किसी संचयी प्रभाव के एक सालाना इंक्रीमेंट रोकने के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि छोटी सजा के मामले में भी कर्मचारी को प्रस्तावित कार्रवाई और आरोपों की जानकारी देकर सफाई का उचित अवसर देना जरूरी है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स, 1966 के नियम 16(1)(ए) की अनिवार्य प्रक्रिया है।
याचिकाकर्ता प्रभावती पटेल ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, कोरबा संभाग में सहायक ड्राफ्ट्समैन के पद पर कार्यरत हैं। जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 11 जून 2026 को उनके खिलाफ एक सालाना इंक्रीमेंट रोकने की सजा का आदेश जारी किया था। पटेल की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि यह आदेश नियम 16 के तहत प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध में कोई लिखित सूचना, आरोप या अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना पारित किया गया।
मामले में 10 जून 2026 को निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी और इसके अगले ही दिन 11 जून को दंड का आदेश जारी कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि बैठक में अधिकारियों के समक्ष रखी गई जानकारी संबंधित मैदानी अधिकारियों से प्राप्त तथ्यों के आधार पर दी गई थी और वह अपने शासकीय दायित्व का निर्वहन कर रही थीं। रिकॉर्ड से भी यह स्पष्ट नहीं हुआ कि दंड आदेश जारी होने से पहले उन्हें प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध में कोई नोटिस या सफाई का अवसर दिया गया था। इसके विपरीत, उन्होंने 15 जून को अपना पक्ष रखा, यानी दंड आदेश के बाद।
हाईकोर्ट ने कहा कि दंड आदेश के बाद दिया गया अभ्यावेदन नियम 16(1)(ए) के तहत आवश्यक पूर्व अवसर की कमी को दूर नहीं कर सकता। अनुशासनात्मक प्राधिकारी को दंड लगाने से पहले कर्मचारी की सफाई पर विचार करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि यह तय किया जा सके कि दंड आवश्यक है या नहीं और यदि आवश्यक है तो कौन सा दंड दिया जाए। कथित चूक समीक्षा बैठक में स्पष्ट होने या दंड छोटी होने का आधार भी इस कानूनी प्रक्रिया को समाप्त नहीं करता। खासकर जब याचिकाकर्ता ने आरोपों के आधार और अधिकारियों को दी गई जानकारी की सत्यता पर ही सवाल उठाया हो। कोर्ट ने 11 जून 2026 के दंड आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कहा कि यदि कानून इसकी अनुमति देता है तो सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकारी छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छोटी सजा के मामले में भी कर्मचारी को आरोपों का सामना करने और अपनी सफाई देने का अवसर देना प्राकृतिक न्याय की न्यूनतम आवश्यकता है।
