आदिवासी युवती के यौन शोषण के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत खारिज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानव तस्करी की शिकार हुई करीब 21 वर्षीय आदिवासी युवती के यौन शोषण के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ यौन शोषण का आरोप है और पीड़िता शेड्यूल्ड ट्राइब समुदाय की सदस्य है।
मामले के अनुसार सरगुजा क्षेत्र में शकील खान और इमरान अंसारी पर आदिवासी युवतियों को काम दिलाने के बहाने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में ले जाकर बेचने का आरोप है। पुलिस ने पूछताछ के बाद पीड़िता को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के सरवन गोहानी निवासी राकेश राठौर और उसके पुत्र सुमित राठौर के घर से बरामद किया था। दोनों को 26 जून 2025 को भारतीय न्याय संहिता और एट्रोसिटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।
निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद राकेश और सुमित ने हाईकोर्ट में आवेदन पेश किया। उनकी ओर से कहा गया कि मानव तस्करी के आरोप सह-आरोपियों के खिलाफ हैं। यह भी तर्क दिया गया कि पीड़िता ने पूछताछ में सुमित राठौर के साथ शादी होने की बात कही है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता और सुमित के बीच विवाह का कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता शेड्यूल्ड ट्राइब समुदाय की सदस्य है और गैर-आदिवासी आरोपियों पर उसके यौन शोषण का आरोप है। इसके अलावा, मुख्य परीक्षण में पीड़िता ने अभियोजन के मामले का स्पष्ट रूप से समर्थन किया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
