कर्मचारी की बर्खास्तगी के खिलाफ अपील पर अधीनस्थ अधिकारी के आदेश की पुष्टि करना पर्याप्त नहीं-हाई कोर्ट
बिलासपुर बर्खास्तगी के खिलाफ आरक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच के बाद कर्मचारी की बर्खास्तगी के खिलाफ अपील पर अपीलीय प्राधिकारी को स्वतंत्र रूप से सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। केवल अधीनस्थ अधिकारी के आदेश की पुष्टि करना पर्याप्त नहीं है।
मामले के अनुसार, आरक्षक चंद्रकांत ध्रुव के खिलाफ दुराचरण के आरोप में विभागीय जांच के बाद एसपी गरियाबंद ने 16 अप्रैल 2018 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ आईजी रायपुर रेंज के समक्ष दायर अपील 29 अक्टूबर 2018 को खारिज कर दी गई। इसके बाद डीजीपी के समक्ष दया अपील भी 9 जुलाई 2019 को खारिज कर दी गई आरक्षक ने इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुनय कुमार श्रीवास्तव और अंकुर दीवान ने तर्क दिया कि अपील पर निर्णय लेते समय छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 27(2) के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
कोर्ट ने एसपी गरियाबंद, आईजी रायपुर और डीजीपी के आदेश निरस्त करते हुए मामला नए सिरे से निर्णय के लिए डीजीपी को वापस भेज दिया। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने और नियम 27(2) के तहत सभी पहलुओं पर विचार कर 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
