रजिस्टर्ड सेल डीड रद्द करने का अधिकार कलेक्टर को नहीं
० हाईकोर्ट ने आंशिक रूप से निरस्त किया आदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि राजस्व अधिकारी म्यूटेशन की वैधता और छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165 की पाबंदियों की जांच कर सकते हैं। इसके बावजूद अधिकारी रजिस्टर्ड सेल डीड को सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के बिना औपचारिक रूप से रद्द नहीं कर सकते।
यह मामला भास्करपारा कोल कंपनी लिमिटेड के उप महाप्रबंधक संजीव शर्मा व जतिन भावसार की याचिका से संबंधित था। कंपनी मेसर्स इलेक्ट्रोथर्म (आई) लिमिटेड और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है तथा भास्करपारा कोल ब्लॉक से कोयला खनन के लिए गठित किया गया था। कोयला ब्लॉक में करीब 515 हेक्टेयर वनभूमि होने के कारण प्रतिपूरक पौधरोपण के लिए कंपनी ने सरगुजा के बैजनाथपुर (सहानपुर) में गया प्रसाद, बालगोविंद व सत्यनारायण से कुल 36.87 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बाद में खरीदी गई भूमि के एक हिस्से को वनभूमि बताए जाने पर 25 अगस्त 2012 को करेक्शन डीड के जरिए 10.04 हेक्टेयर भूमि वापस कर दी गई* शेष विवाद 5.472 हेक्टेयर पर रह गया। इसमें खसरा नंबर 114, 141 व 144 की 1.919 हेक्टेयर भूमि को झाड़ी जंगल/मनवार गौटिया भूमि तथा खसरा नंबर 120, 122 व 132 की 3.553 हेक्टेयर भूमि को पहाड़ी कोरवा भूमि बताया गया था* याचिकाकर्ताओं ने पुराने राजस्व एवं सेटलमेंट रिकॉर्ड के आधार पर अपने अधिकार का दावा किया*कलेक्टर सरगुजा ने 26 नवंबर 2012 को 16 सितंबर 2010 की रजिस्टर्ड सेल डीड को अमान्य घोषित किया था। इसके खिलाफ राजस्व बोर्ड में की गई रिविजन भी 12 मार्च 2015 को खारिज हो गई* हाईकोर्ट ने कहा कि कलेक्टर धारा 50 के तहत म्यूटेशन की वैधता और धारा 165 में निहित प्रतिबंधों की जांच कर सकते हैं, लेकिन रजिस्टर्ड दस्तावेज की वैधता और पक्षकारों के टाइटल पर अंतिम निर्णय देकर उसे रद्द करना सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार का विषय है* कोर्ट ने कलेक्टर के 26 नवंबर 2012 के आदेश को इसी सीमा तक निरस्त कर दिया और राजस्व बोर्ड के आदेश को भी संशोधित माना* कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी कानून के तहत स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकता है। याचिका को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए अन्य अंतरिम आदेश समाप्त कर दिए गएयाचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट मनोज परांजपे, उनके साथ अधिवक्ता शिवांगी अग्रवाल उपस्थित थीं प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता सीमा वर्मा, अधिवक्ता उत्तरा श्रीवास्तव तथा राज्य की ओर से सरकारी वकील अविनाश सिंह ने पक्ष रखा*
