हाई कोर्ट ने कहा अफसरों पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं डाल सकता एग्जीक्यूटिंग कोर्ट
० मनी अवॉर्ड की वसूली में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का मामला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि , मनी अवॉर्ड के एग्जीक्यूशन की प्रक्रिया को उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में नहीं बदला जा सकता, जो अवॉर्ड के तहत व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं हैं* एग्जीक्यूटिंग कोर्ट केवल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कंटेम्प्ट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल भी नहीं कर सकता ।
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य विरुद्ध ईसीआई कीस्टोन मामले में यह आदेश जारी किया * यह मामला एनएच 63 (पुराना एनएच 16), बस्तर में सड़क निर्माण से जुड़ा है। भारत सरकार की एलडब्ल्यूई योजना के तहत स्वीकृत परियोजना की लागत बाद में 211.53 करोड़ रुपये हुई* ठेकेदार ने 190.33 करोड़ रुपये का अतिरिक्त क्लेम किया, जिसे विभाग ने खारिज कर दिया* इसके बाद एकल मध्यस्थ ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए 2 सितंबर 2022 को 160.30 करोड़ रुपये से अधिक, ब्याज सहित भुगतान का अवॉर्ड दिया*अवॉर्ड के एग्जीक्यूशन के दौरान अधिकारियों के व्यक्तिगत शपथपत्र, व्यक्तिगत पेशी और व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने संबंधी निर्देश दिए गए थे* हाईकोर्ट ने कहा कि, विभागीय अधिकारी द्वारा प्रशासनिक या वित्तीय स्थिति बताने वाला शपथपत्र अपने आप में व्यक्तिगत देनदारी की जिम्मेदारी नहीं बनाता* इसी तरह भुगतान की स्वीकृति की संभावित समय-सीमा बताने वाले बयान को भी अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत डिक्री में नहीं बदला जा सकताकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एग्जीक्यूशन और कंटेम्प्ट अलग-अलग क्षेत्राधिकार हैं केवल मनी अवॉर्ड का भुगतान नहीं होने पर अधिकारियों के खिलाफ कंटेम्प्ट कार्रवाई नहीं की जा सकती। हालांकि, अवॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू लंबित होना अपने आप में स्टे नहीं है; सक्षम कोर्ट से रोक न होने तक अवॉर्ड-होल्डर एग्जीक्यूशन जारी रख सकता है*कंटेम्प्ट कार्रवाई संबंधी निर्देश निरस्तहाईकोर्ट ने अधिकारियों पर व्यक्तिगत शपथपत्र/अंडरटेकिंग, व्यक्तिगत वित्तीय देनदारी और भुगतान न होने पर कंटेम्प्ट कार्रवाई संबंधी निर्देशों को निरस्त कर दिया* हालांकि एग्जीक्यूशन केस नंबर 6/2023 जारी रखने की अनुमति दी और कहा कि, कमर्शियल कोर्ट आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा 36 और सीपीसी के आदेश XXI के तहत कानूनन अनुमत तरीकों से अवॉर्ड की वसूली कर सकती हैराज्य की ओर से राहुल तामस्कर, शासकीय अधिवक्ता और घनश्याम कश्यप, डिप्टी शासकीय अधिवक्ता तथा इसीआई कीस्टोन की ओर से परवेश बुट्टन और पुष्कर भंडारकर, अधिवक्ता उपस्थित थे।
