अवैध हिरासत के नाम पर माँगा, पांच लाख रुपये मुआवजा0 हाईकोर्ट में ग्रामीण की याचिका खारिज

बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए बतौर क्षतिपूर्ति पांच लाख रुपये मुआवजा की मांग वाली ग्रामीण की याचिका को खारिज कर दिया है।

उत्तर छत्तीसगढ़ सरगुजा के बतौली निवासी जामुना प्रसाद गुप्ता की याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता को 2021 में तीन दिन की हिरासत को अवैध बताते हुए 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता साबित नहीं कर सका कि हिरासत बिना कानूनी अधिकार या दुर्भावना से की गई थी।मामला 22 सितंबर 2021 का है, जब पुलिस ने उत्तर छत्तीसगढ़ सरगुजा के बतौली निवासी जामुना प्रसाद गुप्ता को धारा 151, 107 और 116 सीआरपीसी के तहत कार्यपालिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया था। जमानत बांड उसी दिन जमा करने के बाद भी रिहाई 24 सितंबर तक नहीं हुई और बाद में जमानत बांड स्वीकार होने पर उन्हें छोड़ा गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया, वह निर्दोष था और हिरासत से मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना पहुंची, उसकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई। जिला न्यायालय ने 28 फरवरी 2025 को उसकी याचिका खारिज कर दी थी। जिला कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई* कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ता कोई ठोस सबूत नहीं दे सका कि कार्रवाई दुर्भावना से की गई थी* पैसे मांगने का आरोप भी बिना साक्ष्य के था।पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि, इस मामले में अवैध हिरासत सिद्ध नहीं होती हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, मौलिक अधिकार के वास्तविक उल्लंघन के बिना मुआवजा नहीं दिया जा सकता* इस टिप्पणी के साथ डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया।

kamlesh Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *