ईओडब्ल्यू ने अरपा भैसाझार परियोजना गड़बड़ी की पहली जांच रिपोर्ट को अस्वीकार किया
०० संभागायुक्त ने चार सदस्यी नई जांच टीम गठित किया
बिलासपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अरपा भैसाझार परियोजना गड़बड़ी मामले में शासन की जांच रिपोर्ट को नकार दिया है। एसीबी ने मामले की संभाग स्तरीय टीम से जांच कराने संभागायुक्त को पत्र जारी किया है। एसीबी के इस पत्र पर कमिश्नर बिलासपुर ने जांजगीर चाम्पा जिला के अधिकारियों की टीम गठित किया गया है।
जिले अरपा भैसाझार सिंचाई परियोजना के नहर लाइन के लिए सिंचाई विभाग के इंजीनियरों द्बारा तैयार नक्शा के अनुसार 104 गांव के भूमि अधिग्रहण के लिए भू अर्जन अधिकारियों ने विधिवत धारा 11, धारा 19 एवं धारा 21 का प्रकाशन कराया। इसके बाद नियमानुसार एवार्ड पारित किया गया। इस मामले की एक व्यक्ति ने भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी व गलत मुआवजा वितरित कर शासन को 27 करोड़ का राजस्व क्षति पहुंचाने की शिकायत की। इस शिकायत के बाद सितंबर 2019 से 5 मार्च 2020 तक व दूसरी बार 4 मई 2020 से 19 जनवरी 2021 तक कोटा एसडीएम के पद में पदस्थ रहे एसडीएम आनंदरूप तिवारी को निलंबित कर जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित कर जांच कराई गई। जांच कमेटी ने कथित रूप से दोषी अधिकारी का पक्ष जाने बिना अपनी रिपोर्ट शासन को प्रेषित किया। शासन ने इस मामले में आगे की कार्रवाई करने पुलिस महानिरीक्षक राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, एसीबी को प्रेषित किया। एसीबी ने जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उसे सिरे से खारिज कर दिया है। एसीबी ने मामले में संभागायुक्त बिलासपुर को पत्र जारी कर मामले की संभाग स्तरीय टीम गठित कर नए सिरे से जांच करने को कहा है। इस मामले में सिर्फ एक ही व्यक्ति को दोषी करार दिए जाने को लेकर शासन की कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठने लगा है। भूमि अधिग्रहण सिर्फ एसडीएम के द्बारा नहीं किया जाता। इसके लिए कई स्तर पर कार्रवाई की जाती है।
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चार सदस्यी जांच दल गठित
एसीबी के इस पत्र पर बिलासपुर संभागायुक्त ने 14 जुलाई 2026 को जांच दल का गठन किया है। जांच दल में बिलासपुर जिला के किसी भी अधिकारी को नहीं रखा गया है। टीम में अपर कलेक्टर जांजगीर-चाम्पा ज्ञानेंद्र सिंह को अध्यक्ष, शशि कुमार चौधरी डिप्टी कलेक्टर जांजगीर-चाम्पा सदस्य, श्यामलाल यादव राजस्व निरीक्षक तहसील कार्यालय अकलतरा व ज्योतिष सर्वे पटवारी चाम्पा को सदस्य नियुक्त किया गया है। चार सदस्यी टीम द्बारा मामले की जांच की जाएगी। टीम को एसीबी द्बारा तय जांच बिन्दू में जांच पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। एसीबी द्बारा पहली जांच रिपोर्ट को अस्वीकार कर फिर से जांच के निर्देश दिए जाने से यह साफ है कि इस मामले में शासन की ओर से कैसी कार्रवाई की जा रही है। शासन ने पूरे मामले में सिर्फ एक अधिकारी को ही बली का बकरा बनाया है।
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आनंदरूप तिवारी ने पूर्व के अधिकारियों प्रमाणित अभिलेख के आधार पर सिर्फ एक गांव का एवार्ड पारित किया है। श्री तिवारी कोटा एसडीएम के पद में दो बार पदस्थ हुए । पहला कार्यकाल उनका सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक कुल 6 माह का रहा। इसके बाद उन्हें दूसरी बार 4 मई 2020 को फिर से कोटा एसडीएम बनाया गया। दूसरा कार्यकाल 19 जनवरी 2021 तक कुल 8 माह का रहा है। उनके पदभार ग्रहण करने के बाद 104 गांव में से सिर्फ सकरी का भू अधिग्रहण का मामला लंबित रहा। इसमें भी उनके पदभार ग्रहण करने से पूर्व के अधिकारी कीर्तिमान सिंह राठौर द्बारा धारा 11 का प्रकाशन कराया गया था। इसके बाद 26 जून 2019 को तत्कालीन अधिकारी अशुतोष चतुर्वेदी ने धारा 19 का प्रकाशन कराया था। इसके बाद धारा 21 का भी प्रकाशन पूरा हो गया था। उनके कार्यकाल में पूर्व के अधिकारियों द्बारा प्रमाणित अभिलेखों के आधार सिर्फ एवार्ड पारित करना शेष रहा है।
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परियोजना का कार्य 2018 से प्रारंभ हुआ
अरपा भैसाझार परियोजना में सिंचाई विभाग के प्रतिवेदन पर नहर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 2018 के पहले से प्रारंभ की गई है। आनंदरूप तिवारी से पहले एसडीएम राजेन्द्र गुप्ता, नूतन कंवर, दिलेराम दाहिरे, देवेंद्र पटेल, कीर्तिमान सिंह राठौर, अशुतोष चतुर्वेदी, देवेश कुमार ध्रुव, एसपी वैध, वीरेन्द्र लकड़ा एवं अखिलेश साहू ने कार्रवाई की है। इस पूरे मामले में सिर्फ एक अधिकारी को निलंबित किया गया है।
