सहायक प्राध्यापक की बर्खास्तगी रद्द,हाईकोर्ट से राहत

० 17 साल की उम्र में दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी थी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 17 वर्ष की उम्र में 1994 में डकैती डालने की योजना, एवं घातक चोट पहुचाने के आरोप से दोषमुक्त होने के बाद एमकॉम, एमफिल व पीएचडी की डिग्री हासिल कर उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की नोकरी पाने वाले को सिर्फ  पुराने आपराधिक मामलों की जानकारी चरित्र सत्यापन में नहीं देने के आधार पर  सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने कहा कि आपराधिक पूर्ववृत्त छिपाने के आधार पर कार्रवाई करते समय नियोक्ता को सभी परिस्थितियों का वस्तुनिष्ठ और समुचित मूल्यांकन करना जरूरी है। मामला अंबिकापुर निवासी हीरा प्रसाद यादव से जुड़ा है, उनका सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) पद पर चयन हुआ था। 5 अक्टूबर 2018 को नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर 2018 को कार्यभार ग्रहण किया और शासकीय राजमोहिनी देवी कन्या पीजी कॉलेज, अंबिकापुर में पदस्थ हुए थे। बाद में आपराधिक मामलों की जानकारी सत्यापन में नहीं देने के आधार पर 17 फरवरी 2025 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।यादव के खिलाफ वर्ष 1994 में दो मामले दर्ज हुए थे। एक मामले में आईपीसी की धारा 399 और 402 तथा दूसरे में धारा 324, 147, 323 और 34 के तहत अपराध दर्ज हुआ था। दोनों मामलों में उन्हें क्रमशः 11 दिसंबर 1997 और 13 नवंबर 1995 को बरी कर दिया गया था। याचिका में बताया गया कि उस समय यादव करीब 17 वर्ष के थे और कक्षा 11वीं में पढ़ रहे थे। इसके बाद उन्होंने एमकॉम, एमफिल और वाणिज्य में पीएचडी की तथा कोई नया आपराधिक मामला सामने नहीं आया*याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे, सहयोगी अधिवक्ता अपूर्वा घोरे ने तर्क दिया कि दोनों मामले नियुक्ति से करीब दो दशक पहले समाप्त हो चुके थे और यादव को बरी किया जा चुका थाबाद में उन्होंने 15 जनवरी 2021 के शपथपत्र में इन मामलों की जानकारी भी दी थी। राज्य की ओर से अकांक्षा वर्मा और सीजीपीएससी की ओर से डॉ. सुदीप अग्रवाल ने पक्ष रखा।हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देना अपने आप में सेवा समाप्ति का आधार नहीं बन जाता। मामले की प्रकृति, घटना के समय व्यक्ति की उम्र, बरी होने की स्थिति, बीते समय, नियुक्ति के बाद का आचरण और सेवा रिकॉर्ड समेत सभी परिस्थितियों पर विचार किया जाना आवश्यक है कोर्ट ने पाया कि सरकार के 17 फरवरी 2025 के आदेश में इन महत्वपूर्ण परिस्थितियों का समग्र रूप से विचार नहीं किया गया* एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया और यादव को तत्काल सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया* उन्हें वरिष्ठता के लिए सेवा की निरंतरता मिलेगी, लेकिन जिस अवधि में उन्होंने सेवा नहीं की उसका बकाया वेतन नहीं मिलेगा।

kamlesh Sharma

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