दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लिए बड़ी सौगात, रेल विकास को मिली नई गति, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन, बिलासपुर (उसलापुर)पेंड्रा रोड तीसरी लाइन को मंजूरी मिली
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ०2 मल्टीट्रैकिग परियोजना कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन तथा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई 288 किलोमीटर तथा कुल लागत 4,254 करोड़ है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, ट्रेनों की गतिशीलता और परिचालन में सुधार होगा तथा यात्री एवं माल परिवहन को अधिक सुगम, तेज और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इन मल्टीट्रैकिग परियोजनाओं का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, रायगढ़ सहित अनेक प्रमुख शहरों तथा मध्य प्रदेश के अनूपपुर, शहडोल आदि क्षेत्रों को मिलेगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से इन क्षेत्रों से उत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के संचालन में अधिक सुविधा होगी तथा यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यात्रा का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही, रेल मार्ग की क्षमता बढ़ने से अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी सुदृढ़ होंगी।
कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन 201 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत 2,975 करोड़ है। परियोजना के पूर्ण होने से प्रतिवर्ष लगभग 322 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत बचत तथा 14.42 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। इस रेल लाइन के विस्तार से अमरकंटक, बांधवगढ़, जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से लगभग 68 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन की संभावना है।
बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन
87 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत 1,279 करोड़ है। इसके पूर्ण होने से प्रतिवर्ष लगभग 96.2 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत बचत तथा 4.3 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। यह परियोजना अचानकमार, अमरकंटक, खुटाघाट, मल्हार और रतनपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए बेहतर रेल संपर्क को बढ़ावा देगी। परियोजना से लगभग 30लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन की संभावना है।
इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र में रेल आधारभूत संरचना का व्यापक विस्तार होगा। यात्री सुविधाओं और कनेक्टिविटी में सुधार के साथ ट्रेनों की गतिशीलता बढ़ेगी, यात्रा अधिक सुगम होगी तथा छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से उत्तर भारत के बीच संपर्क और मजबूत होगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ उद्योग एवं व्यापार के विस्तार, माल परिवहन की क्षमता में वृद्धि और नए रोजगार अवसरों के सृजन को भी गति मिलेगी। इस प्रकार ये परियोजनाएं क्षेत्रीय आर्थिक एवं सामाजिक विकास तथा औद्योगिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेंगी।
