690.70 क्विंटल धान चूहों, कीडों ने नष्ट कर दिया
०० हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने सोसायटी प्रबंधक द्बारा पेश याचिका खारिज किया
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डीबी ने सोसायटी में रख्ो 690.70 क्विंटल धान चूहों, कीडों एवं सूख्ोपन से गायब होने के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने सोसायटी प्रबंधक द्बारा पेश याचिका को खारिज किया है। सहकारी केन्द्रीय बैंक लिमिटेड दुर्ग के शाखा प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने सोसायटी के प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।
याचिकाकर्ता अतुल वर्मा सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कुम्हली, तहसील पाटन, जिला दुर्ग में सोसायटी मैनेजर के तौर पर काम कर रहा है। सोसायटी और अधिकारियों के बीच हुए एग्रीमेंट के मुताबिक खरीदे गए धान को मार्केटिग फ़ेडरेशन को 31.03.2026 को या उससे पहले उठाना था। लेकिन, बार-बार कहने के बावजूद, धान तय समय में नहीं उठाया गया और लंबे समय तक खरीद सेंटर पर रखा रहा। सोसायटी में 690.70 क्विंटल धान की कमी पाई गई। मामले की जांच कराई गई। जांच में इस कमी के लिए याचिकाकर्ता को जिम्मेदार ठहराया गया। दर्ज एफआईआर को रद्द करने पेश याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा उक्त धान मौसम, सूखत, चुहों, कीडों के हमला एवं बोरी खराब होने के कारण हुआ है। इसे रोक पाना संभव नहीं है। इस आधार पर एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई।
शासन की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि
कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, दुर्ग, जामगांव ब्रांच की शिकायत में कहा गया है कि खरीफ मार्केटिग साल 2025-26 के दौरान, सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कुम्हली में कुल 53,956.40 क्विंटल धान खरीदा गया था, और पूरा स्टॉक ०1.04.2026 तक ट्रांसपोर्ट कर दिया गया था। इसके बाद, 23.04.2026 को, फूड डिपार्टमेंट और कोऑपरेटिव डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने खरीद सेंटर का फिजिकल वेरिफिकेशन किया और कथित तौर पर 21,41,170/- रुपये कीमत के 690.70 क्विंटल धान और 2,13,645/- रुपये कीमत के 3,057 बोरों की कमी पाई गई। निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की तरफ से जारी किए गए कम्युनिकेशन के आधार पर, यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता, जो सोसाइटी मैनेजर के तौर पर काम कर रहा था, उसने 23,54,815/- की प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल किया। इसलिए, याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता एवं शासन के पक्ष को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि क्रिमिनल कार्रवाई को रद्द करने की हाई कोर्ट की पावर बहुत खास है और इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए, और सिर्फ़ उन मामलों में किया जाना चाहिए जहाँ आरोपों से कोई कॉग्निजेबल अपराध पता न चले या जहाँ कार्रवाई जारी रखना कानून के प्रोसेस का गलत इस्तेमाल होगा। जांच अभी शुरुआती स्टेज में है और कथित कमी की सही वजहें अभी तक पक्के तौर पर तय नहीं हुई हैं। पिटीशनर की दलीलों में विवादित फैक्ट्स के सवाल शामिल हैं जिनके लिए सबूत इकट्ठा करने और उनका मूल्यांकन करने की ज़रूरत है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की एफआईआर रद्द करने पेश याचिका को खारिज किया है।
