अनाचार से गर्भवती हुई पीडिता को मिली गर्भपात की अनुमति0 सिम्स या जिला अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश0 भ्रूण का डीएनए सैंपल रेफरेंस के लिए सुरक्षित रखें

बिलासपुर। अनाचार के कारण प्रेग्नेंट हुई युवती की याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने उसे गर्भपात कराने की अनुमति प्रदान की है* कोर्ट ने उसे सिम्स या जिला अस्पताल बिलासपुर में सुविधाओं के साथ भर्ती कराने का निर्देश दे भ्रूण का डीएनए सैंपल भी रेफरेंस के लिए सुरक्षित रखने को कहा है *पीडिता ने अपनी याचिका में कहा कि, वह ज़बरदस्ती सेक्सुअल इंटरकोर्स के कारण, प्रेग्नेंट है, जिसे वह अबॉर्ट करना चाहती है, प्रेग्नेंसी उसे बहुत तकलीफ दे रही है और वह ऐसे व्यक्ति से बच्चा पैदा नहीं करना चाहती जिसने उसकी सहमति के बिना उसके साथ रेप किया हो और उसे समाज के सामने बेइज्जत और शर्मिंदा किया हो* इस याचिका में एक्सपर्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स का एक पैनल बनाने का निर्देश देने की मांग की गई * पिटीशनर ने रेस्पोंडेंट्स को यह भी निर्देश देने की मांग की कि,प्रेग्नेंसी खत्म करने के लिए एक्सपर्ट रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को भेजने के लिए उसे जल्द से जल्द छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बिलासपुर में एडमिट किया जाए* कोर्ट ने 19.मई .2026 के ऑर्डर के ज़रिए चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर, बिलासपुर को एक्सपर्ट्स की टीम से पिटीशनर की जांच करने का निर्देश देकर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 (शॉर्ट में “एक्ट, 1971”) के सेक्शन 3(2) और 1971 के एक्ट के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था *रेप विक्टिम को तय करने की आज़ादीआज हुई सुनवाई के बाद जस्टिस एन के व्यास की वेकेशन बेंच ने कहा कि, रेप विक्टिम को यह तय करने की आज़ादी और अधिकार मिलना चाहिए कि,उसे प्रेग्नेंसी जारी रखनी चाहिए या उसे प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाज़त दी जानी चाहिए* इस मामले में, यह बिल्कुल साफ़ है कि, पिटीशनर 14-16 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी में है और जब तक टर्मिनेशन का निर्देश देने वाला ज्यूडिशियल ऑर्डर नहीं मिल जाता, तब तक डॉक्टरों के लिए प्रेग्नेंसी खत्म करना भी मुमकिन नहीं होगा* मामले के फैक्ट्स और हालात, जेस्टेशनल उम्र और ज्यूडिशियल उदाहरणों को देखते हुए, रिट पिटीशन मंज़ूर की जाती है* कोर्ट ने यह भी कहा कि, पिटीशनर को आज या कल सुबह सरकारी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल बिलासपुर या छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (सिम्स ) बिलासपुर में (सुविधाओं के साथ) में भर्ती होने का निर्देश दिया जाता है और उसके बाद, संबंधित अथॉरिटी विक्टिम/ उसके माता-पिता की सहमति लेकर पिटीशनर की प्रेग्नेंसी खत्म करने के लिए एक्सपर्ट रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को भेजेगी* 13. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया जाता है कि भ्रूण का डीएनए सैंपल आगे के रेफरेंस के लिए सुरक्षित रखें क्योंकि आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग है।

kamlesh Sharma

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