गेंग रेप के आरोपियों के विरुद्ध सख्त न्यायिक कार्रवाई की ज़रूरत-हाई कोर्ट

00 सक्ति में युवती से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों की अपील खारिज

बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने गेंग रेप के आरोपियों की अपील खारिज करते हुए कहा कोर्ट इस अपराध की गंभीरता और जघन्य प्रकृति को भी ध्यान में रखता है। आरोपियों द्वारा किया गया काम सिर्फ़ एक व्यक्ति के खिलाफ़ अपराध नहीं है, बल्कि एक महिला की गरिमा और शारीरिक अखंडता का अपमान है। जिस तरह से अपराध किया गया है, वह इंसानी गरिमा और सामाजिक नियमों की पूरी तरह से अनदेखी दिखाता है। इस तरह के अपराधों के लिए सख्त न्यायिक कार्रवाई की ज़रूरत होती है ताकि कानून का शासन बना रहे और यह साफ़ संदेश जाए कि ऐसे काम बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। इंडियन पीनल कोड की धारा 366 और 376D के तहत अपील करने वालों को दोषी ठहराने वाला ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला और सज़ा का आदेश सही है, और इसमें किसी दखल की ज़रूरत नहीं है। अपील में कोई दम नहीं होने के कारण इसे खारिज किया जाता है।

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मामला यह है

13.05.2023 को “विक्टिम”  डिनर करने के बाद, अपने घर के बाहर टहल रही थी।  रात करीब 09:30 PM बजे, जब वह बाहर थी, तो आरोपी युवराज साहू उसके पास आया, उसे अपने साथ चलने के लिए फुसलाया और अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा लिया। उस समय, को-आरोपी रवींद्र बरेठ भी उसी मोटरसाइकिल पर मौजूद था।  दोनों आरोपी पीड़िता को बांधवा तालाब के पास एक जगह ले गए, जहाँ उन्होंने उसके साथ ज़बरदस्ती सेक्सुअल असॉल्ट किया। रात करीब 11:30 PM बजे घर लौटने पर, पीड़िता ने अपने परिवार वालों को घटना के बारे में बताया। पिता ने शक्ति थाना में शिकायत की। पुलिस ने अपराध दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल जांच, मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के बाद आरोपी रवींद्र कुमार बरेठ, युवराज साहू, विक्की सागर के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। विचारण न्यायालय ने तीनों आरोपियों को IPC की धारा 366 के तहत 03 साल की कठोर कैद और Rs.1,000/- का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 06 महीने की अतिरिक्त, IPC की धारा 376D के तहत 20 साल की कठोर कैद और Rs.10,000/- का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 01 साल की अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई है। इसके खिलाफ आरोपियों ने अपील पेश की थी।

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कोर्ट ने एफएसएल रिपोर्ट को पक्का साक्ष्य माना

रिकॉर्ड में मौजूद सबूत, खासकर विक्टिम की लगातार और भरोसेमंद गवाही, जिसकी मेडिकल सबूत (MLC) और फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट से पुष्टि होती है, जिसमें विक्टिम के शरीर और कपड़ों पर सीमेन के दाग और ह्यूमन स्पर्म होने का पता चलता है, यह साबित करता है कि उसे किडनैप किया गया था और एक ही इरादे से कई आरोपियों ने उस पर सेक्शुअल असॉल्ट किया था।

kamlesh Sharma

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