सीवी रमन विवि से गायब हुए छात्र की सीबीआई या सीआईडी से जांच कराने पेश याचिका खारिज
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने रमन विवि के लापता छात्र रोहित कुमार को लेकर उसके पिता अमरेन्द्र कुमार द्वारा पेश बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है । गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की जांच पहले से ही चलने के कारण रिट याचिका विचारणीय नहीं बताते हुए कोर्ट ने इसे खारिज किया है। सीवी रमन विवि में अध्ययनरत छात्र रोहित कुमार के लापता होने पर उसके पिता अमरेन्द्र कुमार ने हाईकोर्ट में हेबियस कार्पस पिटीशन पेश कर कोर्ट से प्रतिवादी 6 रमन विवि की गैर-कानूनी निजी हिरासत से रिहा करने के लिए एक रिट जारी करने का अनुरोध किया। सीबीआई या सीआईडी को जल्दी और असरदार नतीजे के लिए जांच का निर्देश देने की मांग की। याचिका में प्रतिवादी अफसरों की ओर से याचिकाकर्ता को हुई मानसिक परेशानी और तकलीफ के लिए मुआवजे के तौर पर 5 लाख रूपये दिलाने का भी अनुरोध किया । चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने सुनवाई के बाद कहा कि,पार्टियों के वकील को सुनने और रिकॉर्ड में मौजूद मटीरियल को देखने के बाद, इस कोर्ट की सोची-समझी राय है कि एक बार जब काबिल पुलिस अधिकारियों ने पहले ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और जांच चल रही है, तो इस स्टेज पर इस कोर्ट के एक्स्ट्रा जूरिस्डिक्शन का इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं है। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने कानू सान्याल बनाम डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, दार्जिलिंग (1973) 2 एससीसी 674 के मामले में यह माना है कि हेबियस कॉर्पस रिट तभी मेंटेनेबल है जब गैर-कानूनी हिरासत का पहली नज़र में मामला हो,कोई भी ऐसा मटीरियल जिससे पता चले कि लापता व्यक्ति गैर-कानूनी हिरासत में है, और जब एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की जांच पहले से ही चल रही हो, तो रिट पिटीशन मेंटेन करने लायक नहीं है। इसके साथ ही यह याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। याचिकाकर्ता को विधि का सहारा लेने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
