कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर
बिलासपुर। गत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित पीएससी मुख्य परीक्षा का परिणाम आयोग द्वारा मात्र एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिया गया। इतनी कम अवधि में उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष एवं पारदर्शी मूल्यांकन संभव है या नहीं, यह स्वयं एक बड़ा सवाल बन गया* आयोग की अनदेखी के बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है, अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय की गई है *आयोग ने शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया, तब अभ्यर्थियों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी, लेकिन वहां भी चुप्पी साध ली गई* मजबूर होकर अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी* सुनवाई के दौरान भी आयोग की ओर से कोई ठोस एवं संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई लगभग तीन माह आगे बढ़ा दी गई* कल 21 मई को सुनवाई के दौरान वादी अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित सिंह राठौर और दीपा श्रीवास ने जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की वेकेशन बेंच में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि,सीजीपीएससी द्वारा आयोजित कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 की चयन प्रक्रिया में धांधली हुई है* इसकी गंभीरता पूर्वक जांच होने तक चयनित अभ्यर्थियों के इंटरव्यू व इसके बाद दी जाने वाली पोस्टिंग पर रोक लगा दी जाए*पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला सीधे युवाओं के भविष्य, रोजगार और पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है, अभ्यर्थियों के अनुसार आज 22 मई को चयनित अभ्यर्थियों का इंटरव्यू है, जिसके बाद उन्हें पोस्टिंग दे दी जाएगी*तो जाएंगे सुप्रीम कोर्टपरिवादी पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि अब वे इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि यदि तत्काल निष्पक्ष हस्तक्षेप नहीं हुआ तो योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य हमेशा के लिए प्रभावित हो सकता है* कई अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता होती तो आयोग उत्तर पुस्तिकाएं, मूल्यांकन प्रक्रिया और चयन मानदंड सार्वजनिक करने से नहीं बचता*पीड़ित अभ्यर्थियों का आरोपपीड़ित अभ्यर्थियों द्वारा लगाया गया सबसे गंभीर आरोप यह है कि, कई ऐसे अभ्यर्थियों का इंटरव्यू के लिए चयन हुआ है जिन्होंने मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिका लगभग खाली छोड़ दी थी,वहीं दूसरी ओर वर्षों से मेहनत कर रहे योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया* एक ही परीक्षा कक्ष से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में चयन होना भी पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता हैअभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा जांच और ड्रेस कोड के पालन में भी भारी असमानता के आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों को विशेष छूट दी गई जबकि सामान्य अभ्यर्थियों पर कठोर नियम लागू किए गए* इससे पूरी प्रक्रिया पहले से प्रभावित और पक्षपातपूर्ण होने की आशंका और गहरी हो गई है।
इसके अलावा मुख्य परीक्षा परिणाम में आरक्षण रोस्टर के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं अभ्यर्थियों का आरोप है कि मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी रही और प्रभावशाली लोगों, अधिकारियों के करीबी तथा राजनीतिक पहुंच रखने वाले अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
