गोधन संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम : मुख्यमंत्री ने 11 जिलों में 29 गौधाम का किया शुभारंभ

गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री

गौधाम योजना से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को मिलेगा सुरक्षित आश्रय

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बटन दबाकर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना का शुभारंभ किया। प्रथम चरण में राज्य के 11 जिलों में 29 गौधामों ने कामकाज शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जोगीपुर में बनने वाले राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास भी किया। इनमें बिलासपुर जिले के लाखासार, ओखर, जैतपुर और हरदीकला गौधाम भी शामिल है। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने की।कार्यक्रम में कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक सर्वश्री अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशुपालक, गौ सेवक, किसान, ग्रामीणजन, तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों के पशुपालक वर्चुअल जुड़कर कार्यक्रम में भाग लिया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में जिले के कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में प्रस्तावित गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास भी किया। यह अभ्यारण्य लगभग 184 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। राज्य सरकार द्वारा इसके विकास के लिए प्रथम चरण में 1 करोड़ 32 लाख रूपए की मंजूरी प्रदान की गई है। इसके पूर्ण होने पर अभ्यारण्य में एक साथ 2500 के लगभग पशुओं का संरक्षण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। गौधाम योजना के माध्यम से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा तथा पशुधन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ एमओयू किया गया है। इसके तहत कई जिलों में गाय वितरण का कार्य भी प्रारंभ किया गया है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पानी और समुचित देखभाल की व्यवस्था की जाएगी तथा इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित होने वाले सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। इन गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस योजना से सड़क दुर्घटना में भी कमी आएगी।केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गौधाम योजना का शुभारंभ एक पुनीत अवसर है। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है तथा गोधन संरक्षण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है, जब पूरे प्रदेश में एक साथ गौधाम योजना की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में 10-10 गौधाम चरणबद्ध रूप से स्थापित किए जाएंगे, जिससे गौवंश संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे। गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल ने कहा कि गाय हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी है। गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य सरकार सुनियोजित कार्ययोजना के तहत कार्य कर रही है।इस अवसर पर कमिश्नर बिलासपुर सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा चंद्रकांत वर्मा, नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे, सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल, संयुक्त संचालक पशु पालन विभाग जी एस तंवर, गौ सेवा आयोग के जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे, पूर्व सांसद लखन साहू, दीपक सिंह, मोहित जायसवाल सहित बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक उपस्थित थे।

kamlesh Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *