9 वर्षीय छात्रा से दरिंदगी
00 हाई कोर्ट ने ज्योति मिशन स्कूल के प्रिंसिपल को उम्रकैद की सजा सुनाई
00 अपराध छिपाने के आरोपी दो मैडमों को 7-7 वर्ष कैद
०० 2015 में घटना घटित हुआ था
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने चौथी कक्षा की 9 वर्षीय छात्रा के साथ दरिंदगी करने के आरोपियों को दोषमुक्ति किए जाने के निर्णय को निरस्त करते हुए कहा रेप या सेक्शुअल असॉल्ट की विक्टिम साथी नहीं होती, और उसके सबूतों को कानून के हिसाब से कन्फर्म करने की ज़रूरत नहीं होती। कन्फर्म करना सिर्फ़ समझदारी की बात है, सज़ा के लिए कोई शर्त नहीं है। अगर विक्टिम की गवाही भरोसेमंद, नैचुरल, एक जैसी और भरोसेमंद है, और उसमें कोई बड़ी कमी नहीं है, तो कोर्ट बिना किसी इंडिपेंडेंट कन्फर्मेशन के भी उस पर कार्रवाई कर सकता है। पीड़िता की प्रारंभ से गवाही भरोसेमंद रहा है। इसके साथ कोर्ट ने कोरिया जिला के ज्योति मिशन स्कूल के फादर प्रिंसिपल को उम्रकैद 10 हजार रूपये अर्थदंड तथा अपराध होने से रोकने का प्रयास नहीं कर उल्टे पीड़िता की ही पिटाई करने के आरोपित दो मैडमों को 7-7 वर्ष कैद व 5-5 हजार रूपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। पीड़िता को 10 वर्ष बाद हाईकोर्ट से इंसाफ मिला है।
मामला यह है कि चिरमिरी निवासी शिकायतकर्ता महिला ने 9 सितंबर 2015 को ने पुलिस में लिखित शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया कि उसकी 9 वर्ष की बेटी ज्योति मिशन स्कूल में हॉस्टल में रह कर चाथी कक्षा में पढ़ रही। उसने स्कूल के गार्ड के माध्यम से सूचना दी कि वह बीमार है। इस पर वह बेटी से मिलने गई। बेटी ने मां को यूरिनल से ब्लड आने, पेट दर्द होने की बात कही एवं बताई कि रात में वह बाथरूम गई थी। गर्ल्स बाथरूम बंद होने पर वह लड़कों के बाथरूम में गई थी। वहां कोई पाउडर डला था। बाथरूम के बाद पानी डाली इसके बाद उसे चक्कर आने लगा वह कमरे में आकर सो गई। रात में वह सोई थी उसी समय एक व्यक्ति आया एवं उसके साथ कुछ करने लगा जब वह चिल्लाई तो वह व्यक्ति भाग गया उसके चप्पल की आवाज आई। इसके बाद उसे तकलीफ होने लगा। उसने इस बात की जानकारी मैडम किस्मारिया को बताई तो उसने ज पीटा व किसी से नहीं बताने के लिए कहा। फिलोमीना केरकेट्टा को भी घटना की जानकारी दी। उसने भी डांट कर किसी से नहीं बताने व चोट में सरसों तेल लगाने की सलाह दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी जोसेफ धन्ना स्वामी पुत्र तंबू स्वामी उम्र लगभग 5० वर्ष वेस्ट तेजौर तमिलनाडु, वर्तमान पता ज्योति मिशन स्कूल, सरभोका, पुलिस स्टेशन पोड़ी, जिला कोरिया छत्तीसगढ़ प्रिंसिपल एवं फिलोमीना केरकेट्टा पुत्री गुरुवारो केरकेट्टा उम्र लगभग 23 वर्ष निवासी छुईपानी, नारायणपुर, पुलिस स्टेशन झगराखंड, वर्तमान पता ज्योति मिशन स्कूल, सरभोका, पुलिस स्टेशन पोड़ी, जिला कोरिया छत्तीसगढ़, किशारिया पुत्री टी.जे. चाको उम्र लगभग 36 वर्ष पित्तारिका, जिला कासलगोड, केरल, वर्तमान पता ज्योति मिशन स्कूल, सरभोका, पुलिस स्टेशन पोड़ी, जिला कोरिया छत्तीसगढ़ को गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया। मामले में आरोपी जोसेफ धन्ना स्वीमी पर पाक्सो एक्ट एवं 376 के तहत एवं दोनों मैडमों के खिलाफ जानबूझकर अपराध को छिपाने के आरोप में आईपीसी की धारा 119 के तहत अपराध पंजीबद्ब कर चालान पेश किया गया। कोरिया एफटीसी कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ शासन ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की। अपील में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी में सुनवाई हुई। डीबी ने साक्ष्य एवं पीड़िता के बयान को भरोसेमंद एवं मेडिकल जांच को सही ठहराते हुए सत्र न्यायालय के दोषमुक्ति आदेश को रद्द किया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा
दोषमुक्त किया जाना रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों के उलट है और ज़रूरी सबूतों को गलत तरीके से पेश किया गया है। ट्रायल कोर्ट के नतीजे न तो सही हैं और न ही सही और इनसे इंसाफ़ नहीं हो पाया है।
कोर्ट ने सजा पर कहा
जोसेफ धन्ना स्वामी को पाक्सो एक्ट के सेक्शन 6 (जैसा कि 2015 में अपराध होने के समय था) और आईपीसी के सेक्शन 376(2)(डी)(एफ)(के) के तहत सजा वाले अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है। हालांकि, पाक्सो एक्ट के सेक्शन 6 के तहत सजा को देखते हुए, जिसमें ज़्यादा कड़ी सज़ा का प्रावधान है, आईपीसी के सेक्शन 376(2)(द)(डी)(एफ)(के) के तहत कोई अलग सज़ा नहीं दी जाती है। फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया का सवाल है, ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ दूसरे आरोपों के साथ आईपीसी के सेक्शन 119 के तहत एक खास आरोप तय किया था। रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से साफ़ पता चलता है कि वे उस समय सरकारी कर्मचारी थे और कानूनी तौर पर अपराध को रोकने के लिए मजबूर थे। आरोपी द्बारा किए गए अपराध के डिज़ाइन और संभावना के बारे में जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने जानबूझकर इसे छिपाया और इसे होने से रोकने की अपनी कानूनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई। उनकी ओर से यह चूक सिर्फ़ एक चूक या लापरवाही नहीं थी, बल्कि जानबूझकर और सोच-समझकर छिपाई गई थी, जिससे एक नाबालिग बच्चे के खिलाफ़ गंभीर अपराध होने में मदद मिली। सेक्शन 119 आईपीसी के ज़रूरी तत्व बिना किसी शक के साबित हुए हैं। कोर्ट ने आरोपी जोसेफ धन्ना स्वामी को इस जुर्म के लिए सख़्त उम्रकैद की सज़ा एवं 10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर आरोपी को एक वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा। आरोपी फिलोमिना केरकेट्टा और किसमारिया को सात साल की सख़्त कैद और 5-5 हजार का जुर्माना लगाया है, जुर्माना न देने पर, उन्हें छह महीने की साधारण कैद काटनी होगी। कोर्ट ने आरोपियों को दो स’ाह के अंदर संबंधित ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
पीड़िता के शरीर पर चोट पाई गई
पीड़िता की बाईं कलाई पर 1 गुण1.4 इंच की सूजन और चोट थी जिससे दर्द हो रहा था। यह चोट कलाई के ऊपरी हिस्से पर थी। पीड़िता की वजाइना के दाईं ओर चोट थी, चोट की लंबाई आधा इंच गुणा एक इंच थी। इस चोट के नीचे एक और चोट थी जो आधा इंच गुणा पौन इंच की थी। पीड़िता की वजाइना के बाईं ओर भी एक चोट का निशान था, वजाइनल वल्वा सूजा हुआ और लाल था जिससे खून बह रहा था और कुछ खून थक्कों में फंसा हुआ था। पीड़ित का बयान चाइल्ड वेलफ़ेयर कमेटी, बैकुंठपुर के सामने दर्ज किया गया। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता पिं्रयांका राठी ने पैरवी की है।
