पुश्तैनी जमीन पर पांच पोतियों का पूरा नहीं, एक तिहाई हिस्सा
० हाईकोर्ट ने बदला निचली अदालत का फैसला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 13.40 एकड़ पुश्तैनी कृषि भूमि के मालिकाना हक के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पांच पोतियों को पूरी जमीन का मालिक मानने संबंधी निचली अदालत का आदेश संशोधित कर दिया है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डीबी ने स्पष्ट किया कि दादा केनाराम बैरागी अपने हिस्से की केवल छठी संपत्ति ही वसीयत के जरिए बेटे संजय बैरागी को दे सकते थे* इस आधार पर पोतियां जमीन में अपने पिता के कुल एक तिहाई हिस्से की ही हकदार होंगी।
माधुरी प्रमाणिक और सीमा बैरागी (जिनका निधन हो चुका है) की ओर से दायर अपील को हाईकोर्ट ने आंशिक रूप से स्वीकार किया है*मामला बिलासपुर जिले की कोटा तहसील के नवागांव स्थित खसरा नंबर 1141 की 13.40 एकड़ कृषि भूमि से जुड़ा है। वादी रूपा, रत्ना, अंकिता, सिमरन और नैना बैरागी के अनुसार यह जमीन उनके दादा केनाराम बैरागी की थी* उन्होंने 25 जनवरी 2003 को पंजीकृत वसीयत के जरिए अपनी चल-अचल संपत्ति बेटे संजय बैरागी के नाम कर दी थी* केनाराम की 26 मई 2010 को मृत्यु के बाद उनकी चार बेटियों और बेटे के बीच नामांतरण को लेकर विवाद हुआ। संजय बैरागी ने वसीयत के आधार पर पूरी जमीन पर अपना अधिकार जताया था* उनकी 30 जनवरी 2011 को मृत्यु के बाद उनकी पांच नाबालिग बेटियों ने अपने मामा विशालधर के माध्यम से जमीन पर मालिकाना हक और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए सिविल मुकदमा दायर किया* दूसरी ओर, केनाराम की बेटियों ने दलील दी कि जमीन संयुक्त पारिवारिक कारोबार और होटल की आय से खरीदी गई थी, इसलिए इसे केनाराम की स्वयं अर्जित संपत्ति नहीं माना जा सकता*
हाईकोर्ट ने पाया कि वसीयत विधिवत पंजीकृत और प्रमाणित है तथा उसे जाली या दबाव में तैयार किया गया साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया गया* वसीयत में केनाराम की संपत्तियों का व्यापक उल्लेख होने के कारण केवल अलग से जमीन का नाम नहीं होने से उसे वसीयत से बाहर नहीं माना जा सकता*हालांकि, वादी यह साबित नहीं कर सके कि, जमीन केनाराम की स्वयं अर्जित संपत्ति थी* साक्ष्यों से सामने आया कि यह जमीन धमतरी के संयुक्त पारिवारिक होटल की आय से खरीदी गई नेवरा गांव की 9.54 एकड़ जमीन बेचने से प्राप्त रकम से खरीदी गई थी*संजय बैरागी के राजस्व कार्यवाही में दिए गए बयान को भी इस संबंध में महत्वपूर्ण माना गया*
काल्पनिक बंटवारे के आधार पर छह बराबर हिस्से
कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के अनुसार माना कि केनाराम के बेटे और चारों बेटियों को पुश्तैनी संपत्ति में समान अधिकार था* काल्पनिक बंटवारे के आधार पर छह बराबर हिस्से बने, जिनमें केनाराम का हिस्सा केवल एक छठा था* वसीयत से संजय को यह छठा हिस्सा मिला और उनका स्वयं का छठा हिस्सा मिलाकर कुल हिस्सा एक तिहाई हुआ*संजय की मृत्यु के बाद यह हिस्सा उनकी पांचों बेटियों को उत्तराधिकार में मिला* हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला संशोधित करते हुए पांचों बेटियों के मालिकाना हक को इसी एक तिहाई हिस्से तक सीमित कर दिया* शेष हिस्से पर केनाराम की चारों बेटियों का अधिकार बरकरार रहेगा। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का निर्देश दिया गया।

kamlesh Sharma

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