पार्टियों के बीच करीबी और उसके बाद लिव-इन रिलेशनशिप अपने आप में क्रिमिनल लायबिलिटी का नतीजा नहीं-हाई कोर्ट
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महिला द्बारा अपने से 17 वर्ष छोटे युवक पर शादी का वादा कर संबंध बनाने के मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी किए जाने के खिलाफ पेश अपील में कहा कि पार्टियों के बीच करीबी और उसके बाद लिव-इन रिलेशनशिप अपने आप में क्रिमिनल लायबिलिटी का नतीजा नहीं निकाल सकते, क्योंकि लगाए गए अपराधों के ज़रूरी एलिमेंट्स को साबित करने के लिए काफ़ी सबूत नहीं हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी के दोषमुक्ति के खिलाफ पेश अपील को खारिज किया है।
चाम्पा क्ष्ोत्र निवासी महिला ने थाने में लिखित शिकायत कर कही कि वह एक विधवा महिला है, पति की 2020 में मौत हो गई थी। साल 2021 में वह अपने बच्चों की परीक्षाओं के सिलसिले में चंपा आई, वह अपने मरे हुए पति की खरीदी हुई ज़मीन पर बोरिग के काम के सिलसिले में आरोपी के संपर्क में आई। बाद में उनकी बातचीत और टेलीफोन पर बातचीत के दौरान, उनके बीच करीबी बढ़ी। आरोप है कि आरोपी ने बार-बार उसे भरोसा दिलाया कि वह उससे शादी करेगा और 11 जून 2022 को, उसे अपने किराए के घर पर लाकर, शादी का झांसा देकर उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाए। प्रेग्नेंट हो गई और उसके दबाव में गोलियां लेने के बाद अबॉर्शन करवा लिया। बाद में वह शादी से इंकार कर मारपीट करने लगा। शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई उपरांत शिकायतकर्ता को सहमति देने वाली पार्टी होने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त किया।
दोषमुक्ति के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। अपील पर जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास एवं जस्टिस सुधीर कुमार की डीबी में सुनवाई हुई। डीबी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि पीड़िता अपने क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन में माना कि वह पढ़ी-लिखी है और यह समझने में सक्षम है कि उसके हित में क्या है। उसने यह भी माना कि आरोपी उससे 17 साल छोटा था और साल 2021 में टेलीफोन पर बातचीत के दौरान उनकी नज़दीकियां बढ़ी थीं। उसने आगे माना कि उसकी पिछली शादी से उसके दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र क्रमश: लगभग 19 साल और 16 साल है। इस कोर्ट ने पाया कि मारपीट और जबरन प्रेग्नेंसी खत्म करने का आरोप साबित नहीं हुआ है। पार्टियों के बीच करीबी और उसके बाद लिव-इन रिलेशनशिप अपने आप में क्रिमिनल लायबिलिटी का नतीजा नहीं निकाल सकते, क्योंकि लगाए गए अपराधों के ज़रूरी एलिमेंट्स को साबित करने के लिए काफ़ी सबूत नहीं हैं। इसके साथ कोर्ट ने अपील खारिज की है।
