अप्रकृतिक कृत्य किए जाने से क्रोधित होकर हत्या, आरोपी को आजीवन कारावास
बिलासपुर। शराब पिलाकर अप्रकृतिक कृत्य किए जाने से क्रोधित होकर युवक की हत्या करने के आरोपी छात्र को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती छाया सिंह ने आजीवन कारावास एवं 100 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर आरोपी को दो माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
मोपका निवासी धनसाय ने 26 दिसंबर 2024 को मोपका चौकी में सूचना दी कि उसका जीजा मनोज कुमार चंद्राकर 19 दिसंबर 2024 को पत्नी एवं दो बच्चों के साथ अपने ससुराल जर्वे गया था। 24 दिसंबर को वह पत्नी को बैंक में काम होने की बात कह कर अकेले वापस लौटा, इसके बाद उसका फोन बंद आने लगा। इस पर हाउसिंग बोर्ड कालोनी चिल्हाटी में उसके घर जाकर देखा गया। इसमें मनोज कुमार चंद्राकर का शव निर्वस्त्र अवस्था में पलंग में पड़ा था। शरीर में चोट के निशान एवं बिस्तर में खून फैला था। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया। इसके बाद उसके फोन से बातचीत का कॉल डिटेल निकाला गया। इसमें 24 दिसंबर को उसकी आरोपी हरीश कुमार पैकरा पिता अघिन पैकरा उम्र 23 वर्ष निवासी खम्मारडीह लवन बलौदाबाजार-भाठापारा से बात होना पाया गया। पुलिस ने इसके आधार पर संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के संबंध में बिलासपुर आया था। इसी बीच मृतक से उसकी मुलाकात हुई। मृतक उसे अपने घर ले गया एवं शराब पिलाने के बाद अप्रकृतिक कृत्य किया। जब वह होश में आया तो उसे बहुत क्रोध आया व मृतक के रसोई से सब्जी काटने का चाकू, तावा एवं पेचकस से हमला कर हत्या कर उसकी मोटर साइकिल लेकर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी के मेमोरडंम में उसके खून लगे टी शर्ट, स्कार्फ, हत्या में प्रयुक्त तवा, पेचकस, चाकू जब्त किया। इसके अलावा आरोपी के फिंगर प्रिंट सहित अन्य साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।
मामले की पंचम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती छाया सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से उसके कथन पर रेलवे स्टेशन से मृतक की बाइक बरामद होने, उसके टी शर्ट में खून लगने एवं घटना स्थल में मिले फिंगर प्रिंट पर कोई सफाई पेश नहीं किया जा सका, इसके अलावा वह घटना के समय कहां था यह भी नहीं बता पाया। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्यायादृष्टांत को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को धारा 103(1) को दोषी पाया। दोषसिद्ब होने पर आरोपी को आजीवन कारावास एवं 100 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
