शराब घोटाला, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अग्रवाल को सशर्त जमानत मिली
०० ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक लाख का व्यक्तिगत बांड, पासपोर्ट जमा करने का निर्देश
बिलासपुर। जस्टिस बिभू दत्त गुरू ने शराब घोटाला में कथित लेनदेन के आरोपी कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को शर्त के साथ स्थाई जमानत प्रदान किया है। कोर्ट ने आवेदक को एक लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम के दो लोकल ज़मानतदार, ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए, इन कड़ी शर्तों के साथ जमा करना होगा। इसके अलावा पासपोर्ट, ट्रायल की कार्रवाई में सहयोग करना होगा, वह सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई लालच, धमकी या वादा नहीं करेगा, जमानत पर रहने के दौरान कोई भी अपराध नहीं करेगा, घर का पता और/या मोबाइल नंबर बदलने पर, इसकी जानकारी संबंधित कोर्ट को एफिडेविट के ज़रिए देनी होगी। ट्रायल कोर्ट द्बारा लगाई जा सकने वाली कोई भी कड़ी शर्तें। ऊपर दी गई शर्तों का कोई भी उल्लंघन करने पर प्रॉसिक्यूशन को बेल कैंसल करने के लिए एप्लीकेशन देने का अधिकार होगा।
उल्लेखनीय है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एसीबी ने कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रायपुर निवासी रामगोपाल अग्रवाल को एफआईआर नंबर 04/2024, 17 जनवरी 2024 को दर्ज मामले में शराब घोटाला सिंडिकेट के तहत सह आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था। आरोप लगाया गया है कि 2019-2023 के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में शराब बनाने और बेचने से जुड़ी गड़बड़ियों में एक कथित सिडिकेट शामिल था। एफआईआर में दिखाए गए प्रॉसिक्यूशन केस में आरोप है कि कुछ लोग शराब सप्लाई सिस्टम में हेरफ़ेर करके गैर-कानूनी कमाई करने में शामिल थे और यह कमाई कथित तौर पर सिडिकेट के अलग-अलग सदस्यों में बांटी गई थी।
जेल में बंद रामगोपाल अग्रवाल की ओर से हाईकोर्ट में जमानत आवेदन पेश किया गया। जस्टिस बिभू दत्त गुरू की पीठ में आवेदन पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता एवं ईओडब्लयू के पक्ष को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि आवेदक के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन का केस मुख्य रूप से डॉक्यूमेंट्री सबूतों पर आधारित लगता है, जो पहले से ही जांच एजेंसी के पास हैं। आवेदक से कोई रिकवरी पेंडिग नहीं बताई गई है और एफआईआर में उसके खिलाफ कोई खास खुला काम नहीं बताया गया है। कोर्ट इस बात पर भी ध्यान देता है कि ज़्यादातर सह-आरोपी लोगों को सुप्रीम कोर्ट और इस कोर्ट ने रेगुलर और एंटीसिपेटरी बेल पर रिहा कर दिया है, जिनमें मुख्य आरोपी बताए गए लोग भी शामिल हैं। इसलिए, पैरिटी का प्रिंसिपल भी एप्लीकेंट के पक्ष में काम करता है। यह कोर्ट इस बात पर भी ध्यान देता है कि एप्लीकेंट 17.जुलाई 2026 से कस्टडी में है और ट्रायल, जिसमें बड़ी संख्या में गवाह और बहुत सारे डॉक्यूमेंट्री रिकॉर्ड शामिल हैं, में काफी समय लगने की संभावना है। इसलिए, कोर्ट आवेदक रामगोपाल अग्रवाल, जो इकोनॉमिक ऑफेंस विग/एंटी-करप्शन ब्यूरो, छत्तीसगढ़ द्बारा 17 जनवरी 2०24 की तारीख वाली एफआईआर नंबर ०4/2०24 में शामिल हैं, इंडियन पीनल कोड की धारा 42०, 467, 468, 471 और 12०-उ और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत सज़ा वाले कथित अपराधों के लिए दर्ज किया गया था, को बेल पर रिहा करने का आदेश दिया है।
