वनभूमि से 5 हजार पेड़ गायब, जाँच जल्द पूरी करें-हाईकोर्ट
० आयरन ओर माइंस के लिए डायवर्ट की गई थी जमीन
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उत्तर बस्तर कांकेर के ग्राम कच्चे स्थित रिजर्व फॉरेस्ट कम्पार्टमेंट नंबर 608 की 32.36 हेक्टेयर वनभूमि से पेड़ों के कथित तौर पर गायब होने के मामले में लंबित जांच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। यह जमीन मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड की अरी-डोंगरी आयरन ओर माइंस के विस्तार के लिए डायवर्ट की गई थी। राजेश रंगारी की ओर से पेश जनहित याचिका में बताया गया कि वन विभाग के रिकॉर्ड में 20 सेंटीमीटर से अधिक घेरा वाले 11,765 पेड़ दर्ज थे। इनमें से 6,070 पेड़ काटे जा चुके थे और 5,695 पेड़ शेष बताए गए थे, लेकिन जून 2023 की जांच में केवल 712 पेड़ मौके पर खड़े मिले, जबकि 4,983 पेड़ गायब पाए गए। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस विसंगति की जांच चल रही है। 19 नवंबर 2025 की रिपोर्ट पूर्व रिपोर्ट से मेल नहीं खाने पर डीएफओ ने असहमति दर्ज करते हुए 20 नवंबर को नए सिरे से जांच के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट के लिए रिमाइंडर भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान दबाई गई लकड़ी के मामले में कंपनी से लकड़ी की कीमत और जुर्माने के रूप में 3,06,341 रुपये की मांग की गई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि, वन विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू किए जाने के मद्देनजर पीआईएल का निपटारा किया जा रहा है। कोर्ट ने अधिकारियों को जांच शीघ्र पूरी कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, अवैध कटाई या पेड़ों के गायब होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बेंच ने शेष वनभूमि की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा वनभूमि डायवर्जन की मंजूरी के साथ जुड़ी शर्तों का उल्लंघन रोकने को कहा। कोर्ट ने पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए नियमों के अनुसार क्षतिपूरक एवं सुधारात्मक पौधरोपण पर भी जोर दिया और प्रभावित क्षेत्र में खोए पेड़ों की संख्या से अधिक पेड़ लगाने की पहल की अपेक्षा जता। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समरथ सिंह मरहास, केंद्र की ओर से अन्नपूर्णा तिवारी और राज्य की ओर से पी के दास, अतिरिक्त महाधिवक्ता उपस्थित रहे।
