दादा ने दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग पोती को न्याय दिलाया
०० पुत्र मोह में फंसे बिना उसने थाने में घटना की रिपोर्ट लिखाई
०० हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान को विश्वसनिय माना, आरोपी की अपील खारिज
बिलासपुर। नाबालिग बेटी की संरक्षक पिता ने ही अस्मत लूट ली। वारदात की जानकारी होने पर पीड़िता के दादा ने स्वयं थाने में उपस्थित होेकर अपने बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। न्यायालय ने आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी सजा की पुष्टि करते हुए आरोपी की अपील को खारिज किया है।
प्रदेश में एक शराबी पिता ने अपने ही नाबालिग पुत्री के साथ दुष्कर्म किया। पिता के हैवानियत की शिकार हुई बालिका ने घटना के संबंध में अपने दादा को जानकारी दी। दादा ने अगस्त 2019 में थाना में उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया कि उसका पुत्र शराब पीने का आदी है। शराब के नशे में पत्नी के साथ मारपीट करता है। पति के मारपीट से परेशान होकर पत्नी बच्चों को छोड़कर चली गई है। बच्चे दादा-दादी के साथ रह रहे थे। पिता अपने 13-14 साल की बेटी को साथ ले गया व उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता का मेडिकल, जन्म प्रमाणपत्र, फारेंसिक जांच एवं अन्य कार्रवाई पूरा कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया। सत्र न्यायालय एफटीसी पाक्सो ने मामले की सुनवाई एवं गवाहों के बयान के बाद आरोपी को
धारा 376(2)(क) के तहत 1,000/- रुपये के जुर्माने के साथ उम्रकैद,सेक्सुअल ऑफेंस से बच्चों का प्रोटेक्शन एक्ट, 2012 के सेक्शन 6 के तहत 2,000/ जुर्माना एवं उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। अपील की सुनवाई के दौरान पीड़ित की माँ नोटिस भेजा गया लेकिन पीड़ित की ओर से इस अपील का विरोध करने के लिए कोई भी पेश नहीं हुआ । हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई में पाया कि पीड़िता की मां, दादा, गांव के सरपंच सहित ट्रायल कोर्ट ने 12 गवाहों का परीक्षण किया। ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई कमी नहीं होने पर कोर्ट ने अपने आदेश में कहा .पीड़िता की गवाही बहुत ज़रूरी है और जब तक कोई मज़बूत वजह न हो जिससे उसके बयान को साबित करने की ज़रूरत हो, कोर्ट को सिर्फ सेक्शुअल असॉल्ट की पीड़िता की गवाही के आधार पर किसी आरोपी को दोषी ठहराने में कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए, अगर उसकी गवाही भरोसा जगाती है और भरोसेमंद पाई जाती है। इस आधार पर आरोपी की अपील को खारिज किया है।
