वसीयत के आधार पर नामांतरण आरोपितों को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली
बिलासपुर।वसीयत के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण कराने के मामले में चार आरोपितों को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि वसीयत असली है या फर्जी, यह ट्रायल कोर्ट में तय किया जा सकता है। आरोपित अप्रैल 2025 से आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे, जबकि उन्होंने सीधे हाई कोर्ट का रुख किया।कोर्ट ने एफआईआर और चार्जशीट रद करने की याचिका खारिज कर दी। मामला रायपुर के गुढ़ियारी थाना क्षेत्र का है। याचिकाकर्ता चंद्रिका प्रसाद देवांगन, पुरुषोत्तम देवांगन, जितेंद्र कुमार देवांगन और रजत देवांगन स्वर्गीय टीकाराम देवांगन के बेटे और पोते हैं। निर्मला देवांगन ने पुलिस में शिकायत की थी कि आरोपितों ने सात अक्टूबर 2013 को बनाई गई फर्जी वसीयत के आधार पर राजस्व रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराया।कार्यवाही को रद करने की रखी मांग पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज की। 22 मार्च 2025 को चार्जशीट न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश की गई। आरोपितों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पूरी आपराधिक कार्यवाही रद करने की मांग की।बेंच ने कहा कि आरोपितों को पहले ट्रायल कोर्ट में अपना पक्ष रखना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वसीयत की असलियत और फर्जीवाड़े के आरोप ट्रायल कोर्ट में उठाए जा सकते हैं। हाई कोर्ट ने आरोपितों को उचित डिस्चार्ज आवेदन पेश करने की स्वतंत्रता दी है।
