हाईकोर्ट ने कहा चाइल्ड केयर लीव देने का मकसद बच्चे सही देखभाल और परवरिश करना

०० याचिकाकर्ता को चाइल्ड केयर लीव देने का निर्देश

बिलासपुर। जस्टिस विभु दत्त गुरू ने सेंट्रल जेल में स्टाफ की कमी बताकर महिला वार्डर को चाइल्ड केयर लीव नहीं दिए जाने के खिलाफ पेश याचिका में कहा एक बार जब कोई कर्मचारी छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज़ (लीव) रूल्स, 2010 के रूल 38-सी के तहत एलिजिबिलिटी की शर्तें पूरी कर लेता है, तो स्टाफ की कमी या एडमिनिस्ट्रेटिव ज़रूरतों के आधार पर चाइल्ड केयर लीव देने से मना नहीं किया जा सकता, इसका मकसद बच्चे के शुरुआती सालों में उसकी सही देखभाल और परवरिश करना है। इसके साथ कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चाइल्ड केयर लीव देने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता श्रीमती मंदा तिवारी केन्द्रीय जेल बिलासपुर में जेल वार्डर के पद में पदस्थ हैं।

10.09.2025 को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। 13.04.2026 से 11.07.2026 तक के समय के लिए चाइल्ड केयर लीव दी गई थी। इसके बाद, बच्चों की कम उम्र और उनकी लगातार मैटरनल केयर की ज़रूरत को देखते हुए, याचिकाकर्ता ने चाइल्ड केयर लीव को और 60 दिनों के लिए बढ़ाने के लिए एक आवेदन दिया। उसके आवेदन को यह कहते हुए खारिज किया गया कि स्टाफ़ की कमी या एडमिनिस्ट्रेटिव परेशानी महिला जेल की सुरक्षा ज़रूरतों और महिला वार्डर की सीमित उपलब्धता को देखते हुए याचिकाकर्ता की रिक्वेस्ट नहीं मानी गई।

इसके खिलाफ पेश याचिका में हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक से शपथपत्र में जवाब मांगा था। जेल अधीक्षक की ओर से जवाब आने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्टाफ की कमी या एडमिनिस्ट्रेटिव ज़रूरतें कानूनी फायदे से इनकार करने का सही आधार नहीं बन सकतीं। सर्विस की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सही एडमिनिस्ट्रेटिव इंतज़ाम करना एम्प्लॉयर का काम है और ऐसी एडमिनिस्ट्रेटिव रुकावटें कानूनी हक को ओवरराइड नहीं कर सकतीं। चाइल्ड केयर लीव देने के पीछे के मकसद, पिटीशनर के जुड़वां बच्चों की कम उम्र और यह मानी हुई बात कि पिटीशनर अभी भी इस फायदे के लिए एलिजिबल है, को ध्यान में रखते हुए, सिर्फ स्टाफ की कमी के आधार पर पिटीशनर की रिक्वेस्ट को खारिज करना मनमाना है और कानून के हिसाब से टिक नहीं सकता, इसलिए इसे रद्द किया किया जाता है। कोर्ट ने रेस्पोंडेंट्स को निर्देश है कि अगर पिटीशनर इस दौरान गैरहाज़िर रही है, तो उसे उसकी रिक्वेस्ट की तारीख से 60 दिनों के और समय के लिए चाइल्ड केयर लीव मंज़ूर करें, और उसे उस समय के लिए चाइल्ड केयर लीव पर माना जाए। इस ऑर्डर की कॉपी मिलने की तारीख से सात दिनों के अंदर ज़रूरी नतीजे के ऑर्डर सक्षम अथॉरिटी द्बारा जारी किए जाएंगे।

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केन्द्रीय जेल में सिर्फ13 महिला वार्डर पोस्टेड

हाईकोर्ट के आदेश पर जेल अधीक्षक ने शपथपत्र प्रस्तुत कर यह जानकारी दी कि बिलासपुर सेंट्रेल जेल में 3 वार्डर की 106 मंज़ूर पोस्ट हैं, जिनमें से 82 पोस्ट भरी हुई हैं और 24 पोस्ट खाली हैं। आगे यह भी कहा गया है कि सेंट्रल जेल, बिलासपुर में सिर्फ़ 13 महिला वार्डर पोस्टेड हैं और महिला वार्डर की कमी और एडमिनिस्ट्रेटिव ज़रूरतों की वजह से पिटीशनर की और चाइल्ड केयर लीव देने की रिक्वेस्ट को मना कर दिया गया।

kamlesh Sharma

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