ऑक्सीजोन की जमीन में थाना निर्माण, हाईकोर्ट ने शासन से पूछा पुलिस स्टेशन का कंस्ट्रक्शन कैसे करेंगे ०० निर्माण के दौरान पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाने का निर्देश
00आने वाली पीढ़ियों के लिए इकोलॉजी और एनवायरनमेंट को बचाने की ज़रूरत
बिलासपुर। अवकाशकालीन कोर्ट ने शंकर नगर रायपुर में ऑक्सीजोन में थाना बनाए जाने के खिलाफ पेश याचिका में कहा राज्य अगली सुनवाई की तारीख पर यह साफ़ करे कि वे पुलिस स्टेशन का कंस्ट्रक्शन कैसे करेंगे, जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है, ज़मीन पर लगे दूसरे पेड़ों को भी बचाकर रखें और यह भी बताए कि राज्य द्बारा 36 पेड़ काटने के बदले वे मुआवज़े के तौर पर पेड़ कैसे लगाएंगे और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से सलाह लेकर प्लांटेशन का प्लान भी बताएं ताकि कंस्ट्रक्शन के दौरान भी नए लगाए गए पेड़ सुरक्षित रहें और कंस्ट्रक्शन के स्टेज पर भी उन पर कोई बुरा असर न पड़े। यह भी उम्मीद है कि चूंकि बारिश का मौसम बहुत जल्द शुरू होने वाला है, शासन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से सलाह लेकर तुरंत प्लांटेशन का प्लान बनाएगा। कोर्ट ने कंस्ट्रक्शन का काम उन सुरक्षा उपायों के साथ जारी रखने का निर्देश दिया है। रायपुर नगर निगम के सुभाष चंद्र बोस नगर में ऑक्सीजोन की जमीन को कलेक्टर ने खम्हारडीह थाना निर्माण के लिए आवंटित किया है। सीमांकन के साथ ही यहां निर्माण कार्य प्रारंभ कर पेड़ों की कटाई प्रारंभ कर दी गई। इसके खिलाफ वार्ड वासी प्रमोद यादव एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर ऑक्सीजोन की जमीन में थाना निर्माण का विरोध किया है। हाईकोर्ट की जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की अवकाशकालीन कोर्ट में मामले की शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिकाकताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने कहा कि पुलिस स्टेशन के लिए जो ज़मीन दी गई थी, वह राज्य सरकार द्बारा घोषित एक ऑक्सीजन ज़ोन है, इसलिए वे पुलिस स्टेशन नहीं बना सकते क्योंकि इससे एनवायरनमेंट को नुकसान हो सकता है और पेड़ों को भी नुकसान होगा। राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह रायपुर शहर के मास्टर प्लान के तहत ग्रीन लैंड के तौर पर नोटिफाइड नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार द्बारा तैयार किया गया एक ऑक्सीजन ज़ोन है। उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ़ 36 पेड़ प्रभावित हुए हैं, जबकि उन्होंने पहले ही 2022 में सरकार द्बारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के तहत ज़रूरी मुआवज़े के लिए जंगल लगाने के लिए राज्य सरकार द्बारा मैनेज किए जाने वाले हरियाली कोष के लिए 50,000/- दिए गए हैं। राज्य ने यह दिखाने के लिए डॉक्यूमेंट्स भी रिकॉर्ड में रखे हैं कि कंस्ट्रक्शन के काम के लिए ज़मीन का सीमांकन पहले ही शुरू हो चुका है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता एवं शासन के पक्ष को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा वकीलों के तर्क और रिकॉर्ड में रखे गए डॉक्यूमेंट्स को देखा। सुप्रीम कोर्ट ने 08.02.2023 को फैसला सुनाते हुए निर्देश दिए हैं।
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आने वाली पीढ़ियों के लिए इकोलॉजी और एनवायरनमेंट को बचाने की ज़रूरत डेवलपमेंट और एनवायरनमेंट से जुड़ी चिताओं के बीच मुकाबला हमेशा चलता रहता है। इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इकोलॉजी और एनवायरनमेंट को बचाने की ज़रूरत है, साथ ही, डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को रोका नहीं जा सकता, जो न सिर्फ देश के इकोनॉमिक डेवलपमेंट के लिए, बल्कि कई बार नागरिकों की सेफ्टी के लिए भी ज़रूरी हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि एनवायरनमेंट और इकोलॉजी की सुरक्षा ज़रूरी है। लेकिन, साथ ही, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इंसानी ज़िंदगी भी उतनी ही ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट की बात और केस के फैक्ट्स को ध्यान में रखते हुए, राज्य अगली सुनवाई की तारीख पर यह साफ़ करे कि वे पुलिस स्टेशन का कंस्ट्रक्शन कैसे करेंगे, जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है, ज़मीन पर लगे दूसरे पेड़ों को भी बचाकर रखें और यह भी बताए कि राज्य द्बारा 36 पेड़ काटने के बदले वे मुआवज़े के तौर पर पेड़ कैसे लगाएंगे और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से सलाह लेकर प्लांटेशन का प्लान भी बताएं ताकि कंस्ट्रक्शन के दौरान भी नए लगाए गए पेड सुरक्षित रहें और कंस्ट्रक्शन के स्टेज पर भी उन पर कोई बुरा असर न पड़े। यह भी उम्मीद है कि चूंकि बारिश का मौसम बहुत जल्द शुरू होने वाला है, इसलिए राज्य फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से सलाह लेकर तुरंत प्लांटेशन का प्लान बनाएगा। इसलिए, यह निर्देश दिया जाता है कि कंस्ट्रक्शन का काम उन सुरक्षा उपायों के साथ जारी रखा जाएगा। इसके साथ कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए 9 जुलाई को रखने का निर्देश दिया है।
