फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वाले कर्मचारी पेंशन का हकदार नहीं-हाई कोर्ट

बिलासपुर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वाले रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर ने पेंशन, ग्रेज्युटी व सेवानिवृति लाभ के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है, झूठ और फर्जीवाड़ा के आधार पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वालों की जाति प्रमाण फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी पेंशन सहित अन्य लाभ का हकदार नहीं होगा।रायपुर के कृष्णापुरी, अमलीडीह निवासी पीएल. नायक की नियुक्ति सहायक संचालक के पद पर बंजारा जाति के आधार पर अनुसूचित जाति कोटे से हुई थी 30 जून 2021 को जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय से डिप्टी डायरेक्टर के पद से रिटायर हुए। विभाग ने उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ और अन्य लाभ रोक दिया है*उच्च स्तरीय छानबनी समिति के फैसले को चुनौतीउच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के फैसले को चुनौती देते हुए नायक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया, उसने ना तो धोखाधड़ी की है और ना ही किसी तथ्य को छिपाया है। लंबे समय तक सेवा दी है, इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद उनकी पेंशन व अन्य लाभों को रोकना गलत है।अपने फैसले में कहा है, जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच किसी भी समय की जा सकती है, भले ही कर्मचारी रिटायर हो गया हो। याचिकाकर्ता ने जितने समय तक काम किया, उस अवधि के दौरान प्राप्त वेतन की वसूली नहीं की जाएगी। चूंकि नियुक्ति का आधार अवैध था, इसलिए भविष्य में कोई भी पेंशन संबंधी लाभ नहीं दिया जा सकता।267 अधिकारी व कर्मचारियों की जाति प्रमाण फर्जी, कोर्ट से मिला स्टेराज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी थी, छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से अब तक, जांच समिति के समक्ष जाति प्रमाण पत्र फर्जी होने के 758 प्रकरण आए हैं। जांच के बाद 26 के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। मंत्रालय, संचालनालय, खेल विभाग, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग जैसे प्रमुख विभागों का डेटा भी पेश किया जा चुक है। छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशार विभाग ने उन 267 अधिकारियों और कर्मचारियों का आधिकारिक सूची जारी की है, जिनकी जाति, छानव जांच समिति द्वारा अमान्य कर दी गई थी।

kamlesh Sharma

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