सेवाकाल के दौरान राजपत्रित अधिकारी से रिकवरी नहीं0 उपपुलिस अधीक्षक के विरूद्ध जारी वसूली आदेश निरस्त
बिलासपुर। उपपुलिस अधीक्षक से अधिक वेतन का भुगतान किये जाने के नाम पर की गई विभागीय रिकवरी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। रिकवरी आदेश निरस्त करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को वसूल की गई राशि तत्काल याचिकाकर्ता के बैंक खाते में वापस जमा करने का निर्देश दिया है। कोतरारोड, राजीव नगर, रायगढ़ निवासी राजेश कुमार शर्मा उपपुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर पुलिस मुख्यालय, रायपुर में पदस्थ थे। सेवाकाल के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी), गुप्तवार्ता, रायपुर द्वारा उनके विरूद्ध इस आधार पर कि सेवाकाल के दौरान उन्हे अधिक वेतन भुगतान किया गया था। इस आधार पर डीएसपी राजेश कुमार शर्मा के विरूद्ध वेतन से वसूली का आदेश जारी कर दिया गया।उक्त वसूली आदेश से क्षुब्ध होकर डीएसपी राजेश कुमार शर्मा द्वारा अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर वसूली आदेश को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता को पूर्व के सेवाकाल के दौरान गलत तरीके से वेतनवृद्धि लग जाने का हवाला देकर उनके विरूद्ध वसूली आदेश जारी किया गया है, अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट ऑफ पंजाब विरूद्ध रफीक मसीह (2015), थॉमस डेनियल विरूद्ध स्टेट ऑफ केरला (2022) एवं जोगेश्वर साहू विरूद्ध यूनियन ऑफ इण्डिया (2025) के न्यायदृष्टांत का हवाला दिया ,जिसमें यह उल्लेख है कि किसी भी शासकीय अधिकारी,कर्मचारी को सेवाकाल के दौरान गलत तरीके से अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर वसूली आदेश जारी दिनांक से 5 (पांच) वर्षों पूर्व या उससे भी अधिक पूर्व के वर्षों में किये गये अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर वसूली नहीं की जा सकती है,चूंकि याचिकाकर्ता के मामले में उन्हे वर्ष 2002 से अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर वसूली आदेश जारी किया गया था जो कि पूर्णतः नियम विरूद्ध है, यह कि उक्त अधिक वेतन भुगतान कार्यालय के स्टाफ द्वारा गलत तरीके से वेतनवृद्धि लगाये जाने के कारण किया गया, याचिकाकर्ता द्वारा उक्त राशि किसी फॉड, धोखाधड़ी, चीटिंग से प्राप्त नहीं की गयी थी, इसके साथ ही उक्त वसूली आदेश जारी किये जाने के पूर्व याचिकाकर्ता को कारण बताओं नोटिस जारी कर सुनवाई का पर्याप्त अवसर भी प्रदान नहीं किया गया था* उच्च न्यायालय में जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की सिंगल बेंच में रिट याचिका की सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता उपपुलिस अधीक्षक (डीएसपी) राजेश कुमार शर्मा के विरूद्ध जारी वसूली आदेश को निरस्त कर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को यह निर्देशित किया कि, वे याचिकाकर्ता से वसूल की गई राशि तत्काल याचिकाकर्ता के बैंक खाते में वापस जमा करें।
