मौत के बाद हालर मिल संचालक बिजली चोरी के आरोप से दोषमुक्त हुआ

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने चोरी की बिजली से हालर मिल चलाने के आरोप में विश्ोष न्यायाधीश विद्युत अधिनियम के तहत सुनाई गई आर्थदंड की सजा को रद्द किया है। कोर्ट ने संचालक को बरी करते हुए जमा की गई राशि लौटाने का निर्देश दिया है। एस.के. चक्रवर्ती, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (विजिलेंस), छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को फरवरी 2006 में सीक्रेट टेलीफोन पर जानकारी मिली कि कुरुद डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के तहत सिरसिदा गांव जिला धमतरी में जोहताराम साहू की हालर मिल में मैग्नेट का इस्तेमाल करके बिजली चोरी की जा रही है। इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, उन्होंने टीम के साथ उस जगह का निरीक्षण किया। इंस्पेक्शन के दौरान, यह पाया गया कि बिजली के मीटर कनेक्शन में छेड़छाड़ की गई थी, क्योंकि ट-फ़ेज उल्टा था। इस हेराफ़ेरी की वजह से, मीटर बिजली की खपत सही से रिकॉर्ड नहीं कर रहा था, मीटर पर छेड़छाड़ के निशान थे और आरोपी कथित तौर पर एक चुंबक का इस्तेमाल करके बिजली चोरी कर रहा था, जिसे उसके बेटे वीरेंद्र साहू ने बनाया था। गवाहों की मौजूदगी में एक स्पॉट इंस्पेक्शन पंचनामा तैयार किया गया और आरोपी ने उस पर साइन किए। मीटर और उससे जुड़े तारों को ज़ब्त करके जूनियर इंजीनियर को सौंप दिया गया। इसके बाद, जूनियर इंजीनियर नीलकंठ चंद्राकर ने पुलिस स्टेशन कुरुद में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने 10.07.2006 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, कुरुद के सामने आरोपी के खिलाफ एफआईआर की धारा 379 और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135/39 के तहत अपराधों के लिए चार्जशीट फाइल की गई। स्पेशल कोर्ट (इलेक्ट्रिसिटी एक्ट) को सौंप दिया गया और ट्रांसफर कर दिया गया। कानूनी ट्रायल कोर्ट ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 135 ए के तहत आरोपी को एक लाख 44 हजार रूपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने पर 6 माह साधारण कारावास भुगतानी की सजा सुनाई। इसके खिलाफ जोहत राम साहू ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। अपील लंबित रहने के दौरान जोहित राम की मौत हो गई। इसके बाद उनके पुत्र ने मुकदमा को आगे बढ़ाया। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा जांच अधिकारी ने मौके में मेगनेट नहीं पाया था। चूंकि मीटर को रिवर्स किया गया था ब्लिंकिग नहीं आ रही थी उस वक्त खपत मीटर में दर्ज नहीं हो रही थी और यह बिजली चोरी ही है। यह सही हैकि यदि मीटर में खराबी हो तो भी खपत दर्ज नहीं होती। मीटर जप्त हैउसकी जांच नहीं की गई। मामले में पक्के सबूतों की कमी को देखते हुए, यह साफ़ है कि अपील करने वाले की सज़ा सिर्फ़ अधिकारी की गवाही पर है। अभियोजन अपील करने वाले के खिलाफ़ बिजली चोरी का आरोप बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहा है। ट्रायल कोर्ट का दिया गया विवादित फ़ैसला रद्द किया जाता है। अपील करने वाले को उसके खिलाफ़ लगाए गए आरोप से बरी किया जाता है। अगर अपील करने वाले ने कोई रकम जमा की है, तो वह कानून के मुताबिक उसके कानूनी वारिसों को वापस कर दी जाएगी। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रणव तिवारी, प्रशांत तिवारी ने पैरवी की है।

kamlesh Sharma

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