सीएमओ पिता ने बेटे को ही अनुभव प्रमाणपत्र जारी कर नियुक्ति दिलाई00 हाईकोर्ट ने 13 वर्षों से पदस्थ राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति को निरस्त किया
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने भाटापारा नगर पालिका परिषद में राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति में पूरी चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता नहीं होने तथा सीईओ पिता द्बारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर उम्मीदवार के चयन को मनमानी मानते हुए पिछले 13 वर्ष से राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति को रद्द किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करते हुए नई नियुक्ति करने का आदेश दिया है। नगर पालिका परिषद भाटापारा, जिला बलौदा बाजार-भाटापारा द्बारा 16 नवंबर 2012 को राजस्व उप निरीक्षक (अनारक्षित) पद हेतु विज्ञापन जारी किया गया था, जिसमें स्नातक एवं पीजीडीसीए अनिवार्य योग्यता निर्धारित थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन प्रस्तुत किया, किन्तु जब पात्र एवं अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई, तो उनका नाम किसी भी सूची में शामिल नहीं किया गया। इसके बावजूद 23 मार्च 2013 को नियुक्ति आदेश जारी कर उत्तरवादी सतीश सिह चौहान की नियुक्ति कर दी गई। इससे व्यथित होकर देवेंद्र कुमार साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ईशान सलूजा ने पक्ष रखते हुए बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता का आवेदन विधिवत प्राप्त हुआ था, फिर भी उसे चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। साथ ही यह भी तर्क रखा गया कि उत्तरवादी सतीश सिह चौहान के पिता उस समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के पद पर पदस्थ थे, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि उत्तरवादी का अनुभव प्रमाण पत्र भी उनके पिता द्बारा ही जारी किया गया, जो प्रथम दृष्टया संदेहास्पद प्रतीत होता है। न्यायालय ने समस्त तथ्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता का आवेदन उपलब्ध होने के बावजूद उसे पात्र/अपात्र सूची में शामिल नहीं करना गंभीर त्रुटि है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी अभ्यर्थी की उम्मीदवारी को इस प्रकार समाप्त करना पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित करता है। न्यायालय ने यह भी माना कि उत्तरवादी के पक्ष में उसके पिता द्बारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है और इससे मनमानी एवं पक्षपात की संभावना प्रबल होती है। इन परिस्थितियों में उच्च न्यायालय ने 23 मार्च 2013 के नियुक्ति आदेश को निरस्त करते हुए निर्देशित किया कि पुन: निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया संचालित की जाए तथा याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार साहू की उम्मीदवारी पर विधिवत विचार कर नया नियुक्ति आदेश पारित किया जाए।
