जग्गी हत्याकांड, अमित जोगी के दोषमुक्ति के खिलाफ पेश सीबीआई की अपील पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई होगी
00 एक अप्रैल को अंतिम बहस के लिए रखा गया
बिलासपुर। जग्गी हत्याकाण्ड मामले में अपराधिक अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गुण-दोष के आधार पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस हाईकोर्ट भेज दिया है; साथ ही, अपील की अनुमति के लिए आवेदन दाखिल करने में हुई देरी को भी माफ कर दिया है। सीबीआई की मिस्लेनियस क्रिमिनल पिटीशन पर आज हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डीबी ने आगामी एक अप्रैल को अंतिम सुनवाई निर्धारित कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द कुमार वर्मा की डीबी में सुनवाई हुई । कहा गया , यह वर्तमान आपराधिक विविध याचिका दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 378(3) के तहत दायर की गई है। इसमें रायपुर, के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा गत 31.मई .2007 को पारित दोषमुक्ति के निर्णय और आदेश के विरुद्ध अपील करने की अनुमति मांगी गई है। इस आदेश द्वारा, विचारण न्यायालय ने, जहाँ एक ओर 19 सह-अभियुक्तों को आजीवन कारावास सहित विभिन्न अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत सजा सुनाई थी, वहीं दूसरी ओर प्रत्यर्थी संख्या 1 को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। याचिकाकर्ता की यह शिकायत है कि,रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद, विचारण न्यायालय ने प्रत्यर्थी संख्या 1 को ‘संदेह का लाभ’ देने में त्रुटि की है। हाईकोर्ट के संज्ञान में यह बात लाई गई कि छत्तीसगढ़ राज्य ने, संबंधित मामलों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आपराधिक अपील (संख्या 1927/2014) दायर की थी। इस अपील में पहले पारित तीन आदेशों को चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने, दोनों पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करने तथा विरोधी तर्कों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर व्यापक विचार-विमर्श करने के उपरांत, 6.नवंबर 2025 को अपना प्रामाणिक निर्णय सुनाया हैइसमें शीर्ष कोर्ट ने दोषमुक्ति के विरुद्ध अपीलों को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे की, और विशेष रूप से इसके दायरे तथा विस्तार की, विस्तृत जाँच की हैहाईकोर्ट ने कहा कि,उपर्युक्त आधिकारिक निर्णय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों को देखते हुए, इस न्यायालय की सुविचारित राय है कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत वर्तमान आवेदन, जिसमें दोषमुक्ति के निर्णय के विरुद्ध अपील करने की अनुमति मांगी गई है, स्वीकार किए जाने योग्य है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट और असंदिग्ध शब्दों में, इस न्यायालय के पिछले आदेश को रद्द कर दिया है और मामले को गुण-दोष के आधार पर नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया है।
साथ ही, अपील की अनुमति के लिए आवेदन दाखिल करने में हुई देरी को भी माफ कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य ज़ोर इस बात पर है कि गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों को तकनीकी आधारों पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए, और मामले की जांच उसके वास्तविक गुण-दोष के आधार पर की जानी चाहिए।
ऐसी परिस्थितियों में, यह न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में और उसकी सहायता के लिए कार्य करने हेतु बाध्य है। तदनुसार, अब इस न्यायालय का यह दायित्व है कि वह मामले को उसके सही परिप्रेक्ष्य में आगे बढ़ाए, और यह सुनिश्चित करे कि अपील की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाए, ताकि दोषमुक्ति के निर्णय की सत्यता की जांच कानून के अनुसार विधिवत की जा सके।. तदनुसार, यह आपराधिक विविध याचिका (क्रमांक CRMP No. 495/2011) स्वीकार की जाती हैपरिणामस्वरूप, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 378(3) के तहत अपील करने की अनुमति, इसके द्वारा प्रदान की जाती है‘पेपर-बुक’ और जमानत बांडहाईकोर्ट ने सुनवाई कर सीबीआई के अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन को निर्देश दिया कि वे प्रतिवादी संख्या 2 की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को ‘पेपर-बुक’ (दस्तावेजों का पूरा सेट) की एक पूर्ण प्रति तत्काल उपलब्ध कराएंप्रतिवादी-अमित ऐश्वर्या जोगी को निर्देश दिया गया कि वे 31 मार्च, 2026 से पूर्व संबंधित विचारण न्यायालय की संतुष्टि के अनुरूप ज़मानत बांड और ज़मानतदार प्रस्तुत करें; ऐसा न करने की स्थिति में, विधि के अनुसार उचित परिणाम भुगतने होंगेजोगी की ओर से एडवोकेट शैलेन्द्र शुक्ला उपस्थित हुए अंतिम सुनवाई एक अप्रैल को निर्धारित की गई है।
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