कर्मचारी की मृत्यु खदान दुर्घटना या अन्य कारणों से होती है, महिला आश्रित मासिक आर्थिक सहायता प्राप्त’ करने का हकदार-हाईकोर्ट

बिलासपुर। जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने एसईसीएल कर्मी की मौत के बाद उसके आश्रित सदस्य को मासिक सहायता राशि नहीं दिए जाने के खिलाफ पेश याचिका में कहा कि यदि कर्मचारी की मृत्यु खदान दुर्घटना में या अन्य कारणों से होती है, अथवा कर्मचारी चिकित्सकीय रूप से अयोग्य हो जाता है, तो उसकी महिला आश्रित को 6,000/- रुपये की मासिक आर्थिक सहायता देय है। इसके साथ कोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के अनुसार याचिकाकर्ता को जिस तारीख को उसने आवेदन दिया उस तारीख से सहायता राशि देने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता श्रीमती अमरेश राजवाड़े के पिता रामप्रसाद एसईसीएल विश्राामपुर के कर्मचारी थ्ो। कार्य के दौरान उनकी 2012 में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद उनकी मां सोन बाई ने एसईसीएल में स्वरोजगार व आर्थिक सहायता के लिए आवेदन दिया। दुर्भाग्य से मां सोन बाई की भी 7 जनवरी 2014 को मौत हो गई। पिता एवं मां की मौत के बाद याचिकाकर्ता श्रीमती अमरेश राजवाड़े ने स्वरोजगार के लिए आवेदन दिया। उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने उन्हें रोजगार के लिए अपात्र माना किन्तु राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के अनुसार उसे मासिक आर्थिक सहायता प्राप्त’ करने का हकदार माना एवं इसके लिए आवेदन करने छूट प्रदान किया। हाईकोर्ट के आदेश पर उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करने आवेदन दिया। प्रबंधन ने उसके आवेदन को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता शुभांक तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश की। याचिका में जस्टिस संजय के. अग्रावल की एकलपीठ में सुनवाई हुई। उन्होंने याचिकाकर्ता एवं एसईसीएल के तर्क को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा याचिकाकर्ता के पिता – रामप्रसाद की मृत्यु के बाद, उनकी पत्नी (अर्थात याचिकाकर्ता की माता), श्रीमती सोना बाई को न तो आश्रित रोज़गार दिया गया और न ही आर्थिक सहायता; और दुर्भाग्यवश, 07.01.2014 को उनकी भी मृत्यु हो गई। जब याचिकाकर्ता ने एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष आश्रित रोज़गार की मांग की, तो 13.12.2017 के आदेश द्बारा उस मांग को अस्वीकृत कर दिया गया। श्रीमती अमरेश राजवाड़े बनाम साउथ ईस्टन कोलफील्ड्स लिमिटेड एवं अन्य) में, जिसका निर्णय 03.07.2018 को हुआ था, यद्यपि इस न्यायालय ने यह माना था कि याचिकाकर्ता आश्रित रोज़गार की हकदार नहीं है, तथापि उसके पक्ष में यह स्वतंत्रता सुरक्षित रखी गई थी कि वह प्रतिवादियों के समक्ष आर्थिक सहायता की मांग कर सकती है। कितु, याचिकाकर्ता की उक्त मांग को भी 23.10.2018 के विवादित आदेश द्बारा अस्वीकृत कर दिया गया। याचिकाकर्ता का मामला ‘राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के दायरे में आता है; जिसमें स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि महिला आश्रित को 6,000/- रुपये की मासिक आर्थिक सहायता देय होगी। आर्थिक सहायता प्रदान करने संबंधी याचिकाकर्ता की मांग को अस्वीकृत करना पूर्णत: अनुचित है। 23.10.2018 का विवादित आदेश इसके द्बारा रद्द किया जाता है। एसईसीएल प्रबंधन को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता को, जो कि एक महिला आश्रित है, ‘राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता के खंड 9.5.0 के उप-खंड के आलोक में, उस तारीख से मासिक आर्थिक मुआवज़ा दें, जिस तारीख को उसने इस प्रयोजन हेतु प्रतिवादियों के समक्ष आवेदन किया था।

kamlesh Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *