हाई कोर्ट ने कांस्टेबल के अगर पद खाली है तो प्रतीक्षा सूची से भरने का निर्देश दिया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़े विवाद पर हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस पीपी साहू ने स्पष्ट किया है कि, सूची जारी होने के बाद भी अगर पद खाली रहते हैं, तो उन्हें वेटिग लिस्ट (प्रतीक्षा सूची) के अभ्यर्थियों से भरा जाएगा। 6 हजार पदों के लिए यह भर्ती हो रही है, जिसमें 25०० उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिया जा चुका है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सबसे पहले चयन सूची में शामिल उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए और उनकी जॉइनिग सुनिश्चित की जाए।इसके बाद कुछ पद खाली रह जाते हैं तो उन पदों को वेटिग लिस्ट के अभ्यर्थियों को मौका देकर भरा जाए। मालूम हो कि एक ही कैंडिडेट का कई-जिलों में सिलेक्शन हो गया था। वास्तविक रूप से बड़ी संख्या में पद खाली रह जाएंगे, जबकि विभाग ने सभी पद भरने का दावा किया था। जॉइनिग के बाद ही स्पष्ट होंगे रिक्त पद राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि चयन सूची मैरिट के आधार पर जिला स्तर पर तैयार की गई है और एक से अधिक जिलों में चयन होना विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि, वास्तविक स्थिति तब सामने आएगी, जब चयनित अभ्यर्थी किसी एक स्थान पर ज्वॉइन करेंगे। ऐसे में जिन अन्य स्थानों पर वे चयनित हैं, वहां पद स्वत: खाली हो जाएंगे। वेटिग लिस्ट से भरे जाएं खाली पद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि, यह स्पष्ट है कि केवल चयन सूची से सभी पद नहीं भर पाएंगे। ऐसे में राज्य शासन को आदेश दिया जाता है कि,पहले चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और जॉइनिग की प्रक्रिया पूरी करे। याचिका में अभ्यर्थियों के आरोप दरअसल आरक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी को लेकर सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली के अभ्यर्थी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान सहित अन्य ने मिलकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट को बेहद भ्रष्ट तरीकों से संपन्न कराया गया। फिजिकल टेस्ट में डेटा रिकॉîडग का काम सरकार ने आउटसोर्स पर नियुक्त टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था। निष्पक्षता का पालन नहीं किया गया। कई अभ्यर्थियों से पैसों का लेन-देन किया गया।
