हाई कोर्ट ने पूछा आरटीआई की 83 हजार सीटें अब 55 हजार कैसे हो गईं?
00 शिक्षा सचिव असम चुनाव में गए उप सचिव ने जवाब पेश किया
00 शासन वास्तविक स्थिति ही अदालत में बताए
बिलासपुर। शिक्षा के अधिकार मामले में सुनवाई करते हुए आज चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के इस जवाब पर नाराजगी जताई कि , दो – तीन साल पहले आरटीआई में स्कूलों में 83 हजार सीटें अब 55 हजार कैसे हो गईं हैं। कोर्ट ने कहा कि, शासन वास्तविक स्थिति बयान करे। शिक्षा के अधिकार को लेकर भगवंत राव ने एडवोकेट देवर्षि ठाकुर के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, इस पर लंबे समय से सुनवाई चल रही हैआज स्कूल शिक्षा सचिव के स्थान पर उप शिक्षा सचिव ने कोर्ट में बताया कि, शिक्षा सचिव को असम चुनाव में भेजा गया है। विभाग ने दुर्ग डीईओ से सबंधित शपथपत्र में कहा कि, आरटीई से जुड़ी हुई 77 शिकायतों का निराकरण कर दिया गया है दूसरी ओर याचिकाकर्ता को भेजी लिखित जानकारी में शासन ने बताया कि, सात शिकायतों का निपटारा कर लिया गया है। इस मामले में सुनवाई के दौरान डीबी ने साफ़ कहा कि, शासन वास्तविक स्थिति ही अदालत में बताए कितनी शिकायतें मिलीं हैं और कितने का निपटारा हो सका है। उन्हीं बच्चों को लेंगे जो शासन ने यह स्पष्ट किया है कि, आरटीआई के अंतर्गत सिर्फ उन्हीं बच्चों को प्रवेश दिया जा सकेगा जो नर्सरी से केजी टू में पहुंचे हैं। इसी तरह नर्सरी क्लास के लिए मान्यता कि जरूरत नहीं होने की बात कही गई , जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर कर कहा कि, नर्सरी के लिए मान्यता नहीं है तो , इस तरह बच्चों का भविष्य अधर में हो जाएगा* यह जानकारी भी सामने आई कि, राज्य में वर्ष 21- 23 तक 83 हजार सीटें थीं जो आज घटकर 55 हजार हो गईं हैं, इस पर भी चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने महाधिवक्ता से सवाल किया।आड़े हाथों लिया था कोर्ट ने इससे पूर्व पिछली बार हुई सुनवाई में शिक्षा के अधिकार मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शिकायतों का विधिवत निराकरण नहीं होने पर शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है । स्कूल शिक्षा सचिव ने अपने शपथपत्र में शिकायतों का निराकरण होने की बात कही थी । बताया गया कि 170 में से 54 शिकायतों का निराकरण हुआ है 118 अभी लंबित हैं। शासन के वकील ने कहा कि , बाकी सब प्रक्रिया अधीन हैं, इस पर कोर्ट ने कहा कि, यह अभी तक प्रक्रिया में ही क्यों है । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि, अब तो समय निकल रहा है , अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जायेगा । इस पर डीबी ने 22 मार्च तक शिकायतों का पूरा निराकरण करते हुए विस्तृत जानकारी भेजने को कहा था । अब इस मामले में 8 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित की गई है।
