आकस्मिक निधि कर्मचारियों को सेवामुक्त करने का आदेश निरस्त
0 संचालक पशु चिकित्सा सेवायें रायगढ़ ने दिया था आदेश
बिलासपुर। विधिपूर्वक अपनाई गई चयन प्रक्रिया में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी आकस्मिक निधि कर्मचारियों को उप-संचालक पशु चिकित्सा सेवायें रायगढ़ ने जबरन सेवामुक्त करने का आदेश दे दिया। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति आदेश को अपास्त कर दिया। साथ ही पूर्व में उच्च न्यायालय द्वारा निराकृत की जा चुकी रिट याचिका के अनुसरण में कार्यवाही करने निर्देश दिया है।
पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी आकस्मिक निधि परिचारक सह चौकीदार भर्ती प्रक्रिया में 44 कर्मचारी चयनित हुए इनका नियुक्ति आदेश दिनांक 16.जुलाई .2012 को जारी किया गया था। इसके बाद से गणेश राम यादव , वीरेन्द्र कुमार राठिया , सुरेन्द्र कुमार बेहरा , दिगम्बर प्रसाद राठिया , श्रीधर पांडा यह सब याचिकाकर्ता इस विभाग में काम करते आ रहे थे। उप-संचालक पशु चिकित्सा सेवायें रायगढ़ ने 8.मई 2025 को सेवा समाप्ति का आदेश पारित कर दिया जिसके विरुद्ध उच्च न्यायालय के समक्ष इस आदेश को अधिवक्ता सुनील सोनी के माध्यम से चुनौती दी गई।
पूर्व में नियुक्ति आदेश 16.जुलाई 2012 के समाप्ति आदेश के विरुद्ध याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी, जिसमें सेवा समाप्ति आदेश के विरुद्ध स्थगन आदेश जारी किया गया। उक्त रिट याचिका में पारित अंतिम आदेश (दिनांक 28.फरवरी 2023 ) के तहत इन्हें सेवा प्रदान की जा रही थी, किन्तु 8.मई 2025 को उप-संचालक पशु चिकित्सा सेवायें रायगढ़ ने बिना वजह इन सबका सेवा समाप्ति आदेश पारित कर दिया गया। इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ता को दोबारा उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा* जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकल पीठ ने सुनवाई करने के बाद सेवा समाप्ति आदेश को अपास्त करते हुये पूर्व में उच्च न्यायालय द्वारा निराकृत की जा चुकी रिट याचिका के अनुसरण में कार्यवाही करने निर्देश दिया है।
